शिमला। प्रदेश उच्च न्यायालय ने शिमला के रिज मैदान पर घोड़ों को शेल्टर मुहैया न करवाने के मामले में हाईकोर्ट को लिखे पत्र पर कड़ा संज्ञान लिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने नगर निगम शिमला और जिलाधीश शिमला से जवाब तलब किया है। मामले पर सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।
भराड़ी निवासी निधि भला ने हाईकोर्ट के नाम लिखे पत्र में यह आरोप लगाया है कि रिज मैदान पर घुड़सवारी के लिए 14 घोड़ों के लिए लाइसेंस दिया गया है, जिन पर बैठकर बच्चे और युवा पर्यटक घुड़सवारी का आनंद लेते हैं, फोटो खिंचवाते हैं। लेकिन इनको शेल्टर न मुहैया होने के कारण इन घोड़ों की स्थिति दयनीय बनी हुई है। इनको रिज मैदान पर मौसम की मार से बचाव का कोई भी प्रबंध नहीं किया गया है। यही कारण है कि बरसात के दिनों में घोड़े भीगते रहते हैं और सर्दी के मौसम में ठंड के कारण ठिठुरते रहते हैं। पिछले 50 सालों से रिज मैदान पर घोड़ों को चलाने की अनुमति प्रदान की गई है। प्रार्थी के मुताबिक दो वर्ष पहले घोड़ों को शेल्टर मुहैया करवाने के उद्देश्य से पैसा स्वीकृत किया गया था लेकिन इस पैसे को नगर निगम द्वारा घोड़ों के शेल्टर के लिए खर्च ही नहीं किया गया।