विजिलेंस के सूत्र डिग्रियां फर्जी होने की बात मान रहे हैं लेकिन अफसर खुलकर कुछ भी कहने को तैयार नहीं। डीएसपी विजिलेंस हमीरपुर बीडी भाटिया ने कहा कि इस मामले में केवल उच्च अधिकारी ही बता पाएंगे।
उधर, राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो मंडी के पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु वर्मा ने कहा कि विजिलेंस को दो दर्जन अध्यापकों की फर्जी डिग्रियों की शिकायत मिली है।
विशेष जांच यूनिट को बिहार मगध यूनिवर्सिटी भेजा गया था। टीम लौट आई है, लेकिन सारा रिकॉर्ड जांच अधिकारी के पास है। जांच अधिकारी की रिपोर्ट आने के बाद ही आगामी कार्रवाई की जाएगी।
राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो शिमला हेडक्वार्टर में एक व्यक्ति ने फर्जी डिग्रियों की शिकायत की है। आरोप है कि वर्ष 2004-05 में प्रदेश शिक्षा विभाग में टीजीटी की भर्तियों में करीब दो दर्जन अभ्यर्थियों ने फर्जी डिग्रियां दिखाकर सरकारी नौकरी हासिल कर ली।
शिकायत में बताया गया है कि 22 अध्यापकों में से 12 पूर्व सैनिक कोटे से भर्ती हुए हैं जबकि 10 ओपन कैटेगिरी के हैं। टीजीटी भर्ती के बाद कुछेक अध्यापक बाद में पदोन्नत होकर पीजीटी बन गए।
शिकायत के बाद हमीरपुर विजिलेंस विभाग की एक टीम बिहार स्थित मगध यूनिवर्सिटी के लिए रवाना हुई। लंबी जांच पड़ताल के बाद 22 में से 21 अध्यापकों का विश्वविद्यालय में कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है।