निजी केमिस्टों की हड़ताल लोगों पर भारी पड़ी। हालांकि आईजीएमसी परिसर और अन्य अस्पतालों में सरकारी दुकानों के खुले रहने से मरीजों को दवाइयां मिलती रहीं। लेकिन यहां भी निजी दुकानों के बंद होने से सरकारी दवा केंद्रों पर भारी भीड़ होने से लोगों को घंटों लाइनों में खड़े रहना पड़ा। वहीं शहर के अन्य हिस्सों में दवा की दुकानों के बंद होने से लोगों को दवाएं नहीं मिलीं।
कुछ ऐसी भी दवाएं थीं जो सरकारी दुकानों पर नहीं मिली। इस कारण मरीजों को भारी दिक्कतें उठानी पड़ीं। ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में हिमाचल प्रदेश सोसायटी ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने इंटरनेट फार्मेसी के विरोध में एक दिन की हड़ताल की थी।
शिमला शहर के करीब 150 लाइसेंस धारकों ने भी शुक्रवार को दुकानें बंद रखीं। निजी दुकानों के बंद होने से दवा लेने आए मरीजों को बैरंग लौटना पड़ा। शहर के बीचोंबीच और अन्य हिस्सों में निजी दुकानों के बंद होने पर लोगों को सिरदर्द तक की दवा लेने के लिए आईजीएमसी और रिपन स्थित सरकारी दुकानों का रुख करना पड़ा।
आईजीएमसी में किए थे पुख्ता प्रबंध
आईजीएमसी के डॉक्टर राहुल गुप्ता ने बताया कि अस्पताल में मरीजों को सिविल सप्लाई, आरकेएस और प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर दवाएं मुहैया करवाई गई हैं। लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो इसके पुख्ता बंदोबस्त किए गए थे।
सरकारी दुकानों का करना पड़ा रुख
सुबह साढ़े ग्यारह बजे के करीब लोअर बाजार में सुंदरलाल दांत दर्द की दवा लेने आए थे। लेकिन उन्हें अन्य लोगों ने दुकानें बंद होने की सूचना दी। वह दर्द से कराहते हुए वहां से लौट आए। इसी तरह मोतीलाल को भी शुगर की दवा नहीं मिली। दवाओं को लेने के लिए उन्हें आईजीएमसी जाना पड़ा।