अर्ली वैरायटी के सेब के बाद अर्ली वैरायटी की विदेशी नाशपाती भी शिमला की फल मंडी में पहुंच गई है। वीरवार को 6800 फीट ऊंचाई में स्थित कोटखाई के बखोल से इटली की कारमैन नाशपाती की खेप भट्ठाकुफर फल मंडी पहुंची।
यहां नाशपाती का 12 किलो का डिब्बा 1200 रुपये में बिका। 6800 फीट ऊंचाई से पहली बार 5 जुलाई को नाशपाती की फसल तैयार होकर बिकने के लिए मंडी पहुंची है। यह नाशपाती सेब से महंगी बिकी। टाइडमैन सेब की 25 किलो की पेटी 1950 रुपये में बिकी। इस हिसाब से सेब का प्रतिकिलो रेड 78 रहा।
जिला शिमला में नाशपाती और प्लम सेब का विकल्प बनने लगे हैं। उमदा किस्त के प्लम और नाशपाती का उत्पादन करने वाले बागवानों को उपज के दाम बढ़िया मिल रहे हैं। जुलाई के पहले हफ्ते में मार्केट में पहुंच चुकी कारमैन नाशपाती सामान्य सीजन शुरू होने से करीब 15 दिन पहले मार्केट में पहुंची है।
कोटखाई बखोल के युवा बागवान मनोज ने बताया कि चार साल पहले उन्होंने इटली की नाशपाती कारमैन अपने बागीचे में लगाई थी। इसका रंग हल्का लाल और पीला होता है। बेहतरीन स्वाद के कारण इसकी मार्केट में खूब डिमांड है।
भट्ठाकुफर मंडी के फल कारोबारी सुशील ठाकुर ने बताया कि मार्केट में अभी नाशपाती बहुत कम है। इसलिए खरीददार नाशपाती में खूब रुचि दिखा रहा है। कारमैन नाशपाती का 12 किलो का डिब्बा करीब 1200 रुपये में बिका है।
इटली से आयात कर भारत लाई गई कारमैन नाशपाती केरल के मॉल में 280 रुपये प्रति किलो बिक रही है। बागवान मनोज चौहान का दावा है कि कारमैन नाशपाती का अधिक उत्पादन होने पर इसे वातानुकूलित वाहनों में महानगरों तक पहुंचाया जा सकता है जहां इसकी अच्छी डिमांड है।