गुरमीत कौर की अदालत ने नाबालिग युवती से दुष्कर्म के दोषी रिंटू गांव और डाकघर लूनिया, तहसील भद्रक जिला भुवनेश्वर उड़ीसा को दो अलग-अलग मामलों में 20 कैद और सात साल की सजा सुनाई।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पाेस्को गुरमीत कौर की अदालत ने नाबालिग युवती से दुष्कर्म के दोषी रिंटू गांव और डाकघर लूनिया, तहसील भद्रक जिला भुवनेश्वर उड़ीसा को दो अलग-अलग मामलों में 20 कैद और सात साल की सजा सुनाई। दोषी को 60 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया। जुर्माना अदा न करने की एवज में तीन साल अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। जिला उप न्यायवादी पीएस नेगी ने बताया कि पीड़िता के पिता की मौत के बाद उसकी मां आरोपी रिंटू के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगी। हालांकि पीड़िता पढ़ाई के लिए रोहड़ू में अपनी नानी के घर रहती थी।
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अगस्त 2020 में पीड़िता अपने घर आई थी, जहां वह आरोपी के साथ रह रही थी। 17 अगस्त 2020 की रात को आरोपी ने पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता की मां ने नालागढ़ थाने में शिकायत दर्ज करवाई। 18 अगस्त को आरोपी को गिरफ्तार किया गया। घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी और उसकी उम्र 18 से 7 साल 7 महीने थी। अभियोजन पक्ष की ओर से मामले में 16 गवाहों को पेश किया गया, जिनके आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया गया।
दोषी को धारा 376 और पोक्सो एक्ट के तहत 20 साल का कठोर कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर दो साल का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। वहीं धारा 506 के तहत सात साल का कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माना किया गया। जुर्माना अदा न करने पर एक साल का साधारण कारावास अतिरिक्त भुगतना होगा।