लोगों में नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ी है और युवाओं को चिट्टे से बचाने के लिए सामूहिक प्रयास तेज हुए हैं। अभियान से जुड़े 2.34 लाख लोग नशे का कारोबार करने वालों की सूचना पुलिस तक पहुंचा रहे हैं, जिससे दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित हो रही है। इसके साथ ही ये लोग युवाओं और समाज को चिट्टे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। युवाओं को नशे की दलदल में जाने से रोकने के उद्देश्य से पंचायती राज और पुलिस विभाग को विशेष निर्देश जारी किए गए, जिसके तहत पंचायत स्तर पर चिट्टे का सेवन करने वालों और नशा तस्करों की पहचान सुनिश्चित की गई। हिमाचल देश का पहला राज्य बन गया है, जहां पंचायत स्तर पर चिट्टा प्रभावित क्षेत्रों का वैज्ञानिक आधार पर वर्गीकरण किया गया।
सर्वेक्षण के आधार पर पंचायतों को रेड, येलो और ग्रीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इनमें 234 पंचायतों को रेड श्रेणी में रखा गया है, जहां चिट्टे का प्रभाव सबसे अधिक पाया गया। इन क्षेत्रों में नशे के प्रभाव को कम करने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी, पंचायत प्रतिनिधियों के सहयोग और पुलिस की निगरानी से सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। सीएम ने कहा कि प्रदेश सरकार चिट्टा मुक्त हिमाचल के संकल्प को जनआंदोलन का स्वरूप देने के लिए प्रतिबद्ध है। समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी से इस चुनौती का प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जहां अपराधियों पर कानून का शिकंजा कस रही है। वहीं नशे से प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए भी प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं।