सदन शुरू होते ही कांग्रेसी पार्षद राकेश चौहान, अर्चना धवन, दिवाकर शर्मा, माकपा पार्षद शैली शर्मा ने कहा कि विपक्ष के 15 और भाजपा के 12 पार्षद मेयर के खिलाफ हैं। वे पद छोड़ दें। इस पर मेयर के पक्ष वाले पार्षद संजीव शर्मा और विवेक शर्मा ने पूछा कि 27 लोगों के हस्ताक्षर कहां हैं? इस पर हंगामा शुरू हो गया।
विपक्षी पार्षद नारेबाजी करते हुए मेयर के सामने आ गए। इनकी करीब दस मिनट तक मेयर के पक्ष वाले छह भाजपा पार्षदों से तीखी नोकझोंक हुई। उधर, बगावती पार्षद मेयर का साथ देने की बजाय चुपचाप तमाशा देखते रहे। इसी बीच आयुक्त ने जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू की कि पार्षद अर्चना धवन ने उनका माइक मोड़ दिया।
विपक्षी पार्षद टेबल पीटने लगे और नारेबाजी की। कहा कि मेयर-डिप्टी मेयर को नई गाड़ियां चाहिए। लोगों को सीवरेज पिला रहे हैं, विदेश दौरे किए जा रहे हैं, लेकिन जनता के काम नहीं कर रहे। इसके बाद विपक्षी पार्षदों ने वॉकआउट कर दिया।
कांग्रेस के हंगामे के बाद मेयर ने 20 मिनट के लिए सदन स्थगित कर दिया। 3:10 बजे जैसे ही दोबारा सदन शुरू हुआ कि आयुक्त ने प्रस्ताव और सवाल पर चर्चा शुरू की। लेकिन भाजपा पार्षद कमलेश मेहता, किमी सूद ने अपने अपने सवाल स्किप करते हुए अपना विरोध जताया। कई ऐसे प्रस्ताव आए जो एफसीपीसी और जीएफसी की बैठक में नहीं गए थे।
इस पर पार्षद शैलेंद्र चौहान ने पूछा कि जब इन कमेटियों की बैठकें ही नहीं बुलानी है तो इन्हें बनाया क्यों है? हमारे इस्तीफे ले लो। मेयर ने तुरंत इन प्रस्तावों को एफसीपीसी में लाने का फैसला लिया लेकिन इस मुद्दे पर नाराज पार्षद मेयर का समर्थन करने वाले पार्षदों से ही भिड़ गए। इसके बाद बगावती पार्षदों के गुट ने भी 3:20 बजे सदन से वॉकआउट कर दिया।