राय ने बताया कि कुल 198 एंबुलेंस में से 143 सड़क पर उतारी जा चुकी हैं। इन एंबुलेंसों को होमगार्ड और स्वास्थ्य विभाग के चालकों के जरिये संचालित किया जा रहा है।
इसके अलावा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत लगे वाहनों को भी मरीजों को लाने ले जाने के लिए लगाया गया है। राय ने कहा कि कंपनी ने शनिवार तक उत्तराखंड से चालकों के पहुंचने का आश्वासन दिया है।
उधर, पांचवें दिन भी जीवीके कर्मियों ने सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया। उन्होंने मांग की कि एंबुलेंस कर्मियों को हरियाणा की तर्ज पर सरकारी नीति के तहत रखा जाए ताकि आठ घंटे से ज्यादा उनसे काम न लिया जा सके।
पांचवें दिन सीपीएम ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन का एलान कर दिया है। सीपीएम विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि जीवीके ईएमआरआई एंबुलेंस सेवा को निर्बाध तरीके से जारी रखने में पूरी तरह विफल साबित हुई है।
साथ ही वह कर्मचारियों का शोषण कर रही है। मांग की कि सरकार तत्काल कंपनी के साथ हुए एमओयू को निरस्त कर कर्मचारियों को अपने अधीन ले।