राजधानी शिमला के प्लानिंग एरिया में अब 35 डिग्री से अधिक ढलान वाले प्लॉट नहीं बिकेंगे। बिकेगी। इससे कम ढलान वाले प्लॉट की रजिस्ट्री के लिए भी लोगों को टीसीपी का एनओसी लेना अनिवार्य होगा। इसके आधार पर ही राजस्व विभाग के अधिकारी प्लॉट की रजिस्ट्री कर सकेंगे। पर्यावरण को बचाने और पहाड़ को सुरक्षित रखने के लिए एनजीटी ने हिमाचल सरकार को यह निर्देश दिए हैं।
एनजीटी के फैसले से जनता और टीसीपी के अधिकारियों का काम और बढ़ गया है। प्लॉट खरीदने और बेचने वाले को टीसीपी कार्यालय के चक्कर काटने पड़ेंगे। टीसीपी का इंजीनियर प्लॉट का निरीक्षण करेगा। उसके बाद लोगों को प्लॉट खरीदने के लिए एनओसी जारी होगा। यह एनओसी प्लॉट के ततीमा और जमाबंदी के साथ अटैच करना होगा। इसके आधार पर ही तहसीलदार प्लॉट की रजिस्ट्री करेगा।
अब शिमला के लिए नया डेवलपमेंट प्लान
एनजीटी के आदेशों की कॉपी प्रदेश सरकार को मिल गई है। बताया जा रहा है कि 160 पेज की कापी को ध्यान में रखते हुए शिमला शहर के लिए नया डेवलपमेंट प्लान बनेगा। शहर में किस तरह से भवन बनेंगे, कहां-कहां सड़कें बनेंगी। सीवरेज सिस्टम और पानी के स्टोरेज टैंक आदि सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए यह प्लान तैयार होगा।
पहाड़ों में अब आसान नहीं भवन बनाना
शिमला के प्लानिंग एरिया में मकान बनाना खासा मुश्किल हो गया है। प्लानिंग एरिया के अधिकांश क्षेत्रों में 35 डिग्री स्लोप वाली जमीन नहीं है। वर्तमान टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के नियमों में 45 डिग्री जमीन के स्लोप में भवन बनाने की अनुमति दी जाती है। अब एनजीटी के आदेशों से विभाग के अधिकारी और जनता पसोपेश में हैं।
9 फुट डंगा लगाने की है अनुमति
टीसीपी से मिली जानकारी के मुताबिक प्लाट के फ्रंट में 9 फुट तक डंगा लगाने की अनुमति दी जाती है। इससे ज्यादा डंगा लगाए जाने से एक तो पहाड़ी का व्यू खत्म होता है, दूसरे मकान खिसकने की भी संभावना रहती है।