अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। मौजूदा नगर निगम का गठन हुए छह माह बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक मेयर, डिप्टी मेयर और पार्षदाें की ट्रेनिंग तक नहीं हो पाई है। ट्रेनिंग के अभाव में मेयर, डिप्टी मेयर और पार्षदों को अपने अधिकारों और कर्तव्यों तक की भी जानकारी नहीं है। कायदे से नए नगर निगम का गठन होने के एक महीने के भीतर निगम प्रतिनिधियों को ट्रेनिंग करवाना अनिवार्य होता है। नगर निगम के मेयर, डिप्टी मेयर और पार्षदों की दो दिवसीय ट्रेनिंग इस हफ्ते 23 और 24 नवंबर को हिप्पा में होनी निश्चित हुई है। इस ट्रेनिंग प्रोग्राम में निगम प्रतिनिधियों को संयुक्त आयुक्त (विधि) जोगेंद्र चौहान नगर निगम के कायदे कानूनों की जानकारी देंगे। इनके अलावा नगर निगम के संयुक्त आयुक्त प्रशांत सरकैक वार्ड सभा, वार्ड कमेटी सहित अन्य कमेटियों, पब्लिक सर्विस गारंटी एक्ट और पार्षदों की ओर से जारी किए जाने वाले विभिन्न प्रमाण पत्रों को लेकर जानकारी देंगे। इसके अलावा नगर निगम की आमदनी और खर्चों को लेकर भी पार्षदों को जागरूक किया जाएगा। अपने काम की बुनियादी जानकारी जो मेयर, डिप्टी मेयर और पार्षदों को छह महीने पहले मिल जानी चाहिए थी, अब जा कर मिलेगी। हालांकि, नगर निगम के कुछ जागरूक पार्षदों की पहल के बाद यह ट्रेनिंग प्रोग्राम निर्धारित किया गया है। निगम के चुनिंदा पार्षदों ने हाउस में यह मुद्दा उठाया था कि उनकी ट्रेनिंग करवाई जानी चाहिए।
बार-बार भेजा गया रिमाइंडर : मेयर
नगर निगम गठित होने के एक महीने के भीतर ही हिप्पा को ट्रेनिंग के लिए डेट देने का आग्रह किया गया था, लेकिन हिप्पा वालों ने टाइम नहीं दिया। दो बार रिमाइंडर भेजने के बाद अब सिर्फ दो दिन का टाइम दिया गया है। एक महीने के भीतर ट्रेनिंग हो जानी चाहिए थी लेकिन हिप्पा से टाइम न मिलने के कारण इतनी देरी हो गई।
इन विषयों की दी जाती है जानकारी
पार्षद के क्या अधिकार हैं और जनता के प्रति उसके क्या कर्तव्य हैं। नगर निगम अधिनियम में शहर से संबंधित क्या प्रावधान है। अपने क्षेत्र को लेकर नगर निगम पार्षद की क्या वित्तीय शक्तियां हैं। एमसी प्रोजेक्टों में बतौर जनप्रतिनिधि पार्षद की क्या सहभागिता है आदि विषयों पर जानकारी दी जाती है।
एक्सपोजर टूर के सपने देख रहे पार्षद
नगर निगम के मेयर, डिप्टी मेयर और पार्षदों की ट्रेनिंग से पहले ही एक्सपोजर विजिट की तैयारियां शुरू हो गई हैं। पार्षद केरल और गोवा घूमने के लिए बेताब हैं। अमृत मिशन के तहत होने वाले इस एक्सपोजर विजिट की फाइल प्रदेश सरकार के पास अनुमति के लिए लंबित है। आचार संहिता के चलते टूर प्रोग्राम को सरकार की अनुमति नहीं मिल पा रही।