आंगनबाड़ी के बजट को पिछले चार वर्षों में बीस हजार करोड़ से घटाकर लगभग आधा कर दिया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में शपथपत्र दायर करके आंगनबाड़ी केंद्रों को मिलने वाली बच्चों की राशि को उनकी माताओं के खाते में डालने की मांग की है।
इससे आंगनबाड़ी केंद्र बंद हो जाएंगे। केंद्र सरकार ने देश के ग्यारह हजार आंगनबाड़ी केंद्र निजी कंपनी के हवाले करके निजीकरण व ठेकेदारी प्रथा की शुरुआत कर दी है।
मध्य प्रदेश व राजस्थान की भाजपा सरकारों ने लगभग सात हजार आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद कर दिया है। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश में सत्तासीन रही सभी सरकारों ने हमेशा ही आंगनबाड़ी कर्मियों से भेदभाव किया है।
इसी कारण से केरल, पुड्डुचेरी, हरियाणा, पंजाब, कर्नाटक, तेलंगाना और महाराष्ट्र के मुकाबले हिमाचल में बहुत कम वेतन दिया जाता है। केरल में आंगनबाड़ी को साढ़े बारह हजार रुपये वेतन दिया जाता है।
पड़ोसी राज्य हरियाणा में वेतन साढ़े ग्यारह हजार रुपये है। ज्यादातर राज्यों में उन्हें पेंशन भी दी जाती है। सभी कर्मचारियों के वेतन के लिए पंजाब पैटर्न को आधार बनाया जाता है लेकिन आंगनबाड़ी के वेतन के लिए इसे पैमाना नहीं बनाया जाता है।
पूरे देश में सबसे कम वेतन हिमाचल में दिया जाता है। उन्हें ग्रेच्युटी व पेंशन नहीं दी जाती। नेशनल रूरल हेल्थ मिशन का पैसा भी नहीं दिया जाता है। इसके विरोध में सात और आठ जून को सचिवालय का घेराव किया जाएगा।