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हिमाचल में दो दिन बंद रहेंगे 19 हजार आंगनबाड़ी केंद्र, ये है वजह

Wed, 06 Jun 2018 09:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
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आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स यूनियन संबंधित सीटू दो दिन तक राज्य सचिवालय पर चौबीस घंटे का महा पड़ाव करेगी। इस दौरान पूरे प्रदेश से हजारों आंगनबाड़ी कर्मी सचिवालय पर घेरा डालो डेरा डालो कार्यक्रम में भाग लेंगे। 

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38 हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की दो दिवसीय हड़ताल के चलते प्रदेश में सात और आठ जून को करीब 19 हजार आंगनबाड़ी केंद्र बंद रहेंगे। आंगनबाड़ी यूनियन की अध्यक्ष खिमी भंडारी और महासचिव राजकुमारी ने बताया है कि केंद्र की मोदी सरकार समेकित बल विकास योजना को खत्म करने की साजिश रच रही है। 

आंगनबाड़ी के बजट को पिछले चार वर्षों में बीस हजार करोड़ से घटाकर लगभग आधा कर दिया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में शपथपत्र दायर करके आंगनबाड़ी केंद्रों को मिलने वाली बच्चों की राशि को उनकी माताओं के खाते में डालने की मांग की है।

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आंगनबाड़ी वर्करों की ये हैं प्रमुख मांगे

आंगनबाड़ी के बजट को पिछले चार वर्षों में बीस हजार करोड़ से घटाकर लगभग आधा कर दिया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में शपथपत्र दायर करके आंगनबाड़ी केंद्रों को मिलने वाली बच्चों की राशि को उनकी माताओं के खाते में डालने की मांग की है।

इससे आंगनबाड़ी केंद्र बंद हो जाएंगे। केंद्र सरकार ने देश के ग्यारह हजार आंगनबाड़ी केंद्र निजी कंपनी के हवाले करके निजीकरण व ठेकेदारी प्रथा की शुरुआत कर दी है।

मध्य प्रदेश व राजस्थान की भाजपा सरकारों ने लगभग सात हजार आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद कर दिया है। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश में सत्तासीन रही सभी सरकारों ने हमेशा ही आंगनबाड़ी कर्मियों से भेदभाव किया है। 
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 इसी कारण से केरल, पुड्डुचेरी, हरियाणा, पंजाब, कर्नाटक, तेलंगाना और महाराष्ट्र के मुकाबले हिमाचल में बहुत कम वेतन दिया जाता है। केरल में आंगनबाड़ी को साढ़े बारह हजार रुपये वेतन दिया जाता है।

पड़ोसी राज्य हरियाणा में वेतन साढ़े ग्यारह हजार रुपये है। ज्यादातर राज्यों में उन्हें पेंशन भी दी जाती है। सभी कर्मचारियों के वेतन के लिए पंजाब पैटर्न को आधार बनाया जाता है लेकिन आंगनबाड़ी के वेतन के लिए इसे पैमाना नहीं बनाया जाता है।

पूरे देश में सबसे कम वेतन हिमाचल में दिया जाता है। उन्हें ग्रेच्युटी व पेंशन नहीं दी जाती। नेशनल रूरल हेल्थ मिशन का पैसा भी नहीं दिया जाता है। इसके विरोध में सात और आठ जून को सचिवालय का घेराव किया जाएगा।
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