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विभिन्न कोर्स में शुरू नहीं हुई एमफिल, पीएचडी

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शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में स्थित एकीकृत हिमालयन अध्ययन संस्थान को अलग विभाग और फैकल्टी बनाया गया है। इसको आर्डिनेंस में शामिल जरूर किया गया है, मगर इससे संबंधित अधिनियम की फाइल पर राजभवन से फैसला आने का अब भी छात्रों को इंतजार है। विवि के इस संस्थान में चल रहे चारों कोर्स को चलाने के लिए अलग विभाग और फैकल्टी बनाकर इसे अधिसूचित तक कर दिया गया था, लेकिन अब मामला अधिनियम के साइन होने पर अटका है। इससे इस अलग बनी फैकल्टी आफ इंटरडिसिप्लेनरी स्टडीज और एनवायरनमेंट, डेवलपमेंट एंड सस्टेनेबिलिटी में इस सत्र से एमफिल और पीएचडी में प्रवेश नहीं हो पाया है। संस्थान में चल रहे चार कोर्स के करीब 192 छात्र-छात्राओं ने अगस्त में इन मांगों के साथ मूलभूत सुविधाएं जैसे क्लास रूम, कंप्यूटर लैब जैसी सुविधा के लिए 28 दिन तक अनशन किया था। इस पर राज्यपाल से मिले आश्वासन के बाद छात्रों ने अनशन समाप्त किया था। अब जबकि दिसंबर शुरू हो गया है, तो छात्रों की मांगें पूरी नहीं हो पाई हैं। छात्रों ने मांग की है कि अधिनियम की फाइल को जल्द साइन किया जाए, जिससे विभाग और फैकल्टी को विभागाध्यक्ष और डीन मिल सके और यह नया विभाग भी अन्य विभागों की तरह से संचालित किया जा सके।
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छात्रों को नहीं मिले नए बने स्मार्ट क्लास रूम
इस नए विभाग के चार कोर्स के छात्रों को अब तक नए बनाए जा रहे स्मार्ट क्लास रूम और कंप्यूटर लैब जैसी सुविधा भी नहीं मिली है। कक्षाएं चलाने के लिए अस्थायी तौर पर कमरों की व्यवस्था जरूरी की गई है।
वर्ष 2015 में आईआईएचएस के छात्रों की डिग्री को लेकर उठे बवाल को शांत करने के लिए विवि ने ईसी से फैसला करवाकर एमबीए ग्रामीण विकास को कामर्स एंड मैनेजमेंट, एमएससी पर्यावरण विज्ञान और आपदा प्रबंधन डिप्लोमा और एमए पहाड़ी मिनियेचर एंड पेंटिंग के लिए विजुअल आर्ट से डिग्री देने की व्यवस्था की थी। अभी तक नए बने संकाय से डिग्री देने की व्यवस्था शुरू नहीं हो पाई है। अधिनियम की फाइल को मंजूरी न मिलने के कारण नई फैकल्टी में एमफिल और पीएचडी में प्रवेश नहीं हो पाया है।
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