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मोबाइल एप्लीकेशन से होंगे कांगड़ा के स्कूल सुरक्षित

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धर्मशाला। आपदा से बचने के लिए स्कूलों की सुरक्षा अब मोबाइल एप्प एप्लीकेशन से की जाएगी। इसके लिए स्कूलों में ‘स्कूल सेफ्टी मोबाइल एप्लीकेशन’ स्थापित की जा रही है। हालांकि पायलट स्तर पर यह प्रोजेक्ट शुरू किया गया है, लेकिन इसकी सफलता के बाद अन्य स्कूलों में भी इसे स्थापित किया जाएगा। धर्मशाला सहित देश के दो अन्य शहरों पटना और आईजोल (मिजोरम) में भी इसे पायलट स्तर पर शुरू किया जाएगा।
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कांगडा भूकंप के लिहाज से सबसे रिस्की जोन में होने की वजह से यह एप्प काफी कारगर सिद्ध माना जा रहा है। वर्ष 1953 से डिफेंस, परिवहन, ऐरोस्पेस की दिशा में भारत के साथ अपनी तकनीकें साझा करने वाली संस्था थैलस की इकाई थैलस फाउंडेशन और जियो हैजर्ड्स सोसायटी (जीएचएस) ने यह सेफ्टी मोबाइल एप्लीकेशन तैयार किया है। इससे आपदा के समय बच्चों को बचाने में सहायता मिलेगी। एंडरॉयड आधारित एप्प को नई दिल्ली स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट (एनआईडीएम) मुख्यालय में नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के सदस्य कमल किशोर, नेश्नल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर प्रोफेसर संतोष कुमार, भारत में थैलस के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर क्रिस्टोफर हम्फ्री, जियोहैजर्ड्स सोसायटी के अध्यक्ष हरि कुमार ने लांच किया है। एप्प में विभिन्न मोड्यूल्स हैं। इससे स्कूल प्रोफाइल, स्कूल के अंदेशा होने वाले जोखिम, उन जोखिमों की पहचान, अन्य लोगों के साथ आपदा प्रबंधन की टीमों का गठन और गाइडेंस आदि शामिल हैं। यदि एक बार डाटा पूरा हो जाए तो यूजर अपना डिजास्टर प्रीप्रेडनेस प्लान को फाउंडेशन के साथ साझा कर सकता है और इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बन सकता है।
भारत में थैलस की कार्यकर्ता चारू पांडेय ने बताया कि यह प्रोजेक्ट जीएचएस स्कूल प्रबंधकों को ट्रेनिंग प्रोग्रामों के लिए तैयार करने के साथ स्टूडेंट्स ट्रेनिंग प्रोग्राम, स्कूल के लिए डिजास्टर्स प्रीप्रेडनेस प्लान को विकसित कर और उन्हें विभिन्न ड्रिल के माध्यमों से टेस्ट कर अंजाम देता है।
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