हिमाचल प्रदेश में डबललेन, फोरलेन, टावर लाइन, रेलवे और एयरपोर्ट के निर्माण में विस्थापन की मार झेलने वालों ने एकजुट होकर मांगों के लिए संघर्ष का बिगुल बजा दिया है। गुरुवार को मंडी के जेलरोड स्थित वरिष्ठ नागरिक कल्याण परिषद भवन में विभिन्न 17 समितियों ने संयुक्त रूप में बैठक में हिमाचल भूमि-अधिग्रहण प्रभावित मंच कर गठन कर आवाज बुलंद की है। मंच में 21 सदस्यीय आयोजन समिति भी बनाई गई है। इसमें बीआर कौंडल को अध्यक्ष मनोनीत किया गया है।
मंडी से जोगिंद्र वालिया को संयोजक और कुल्लू से नरेश ठाकुर, बिलासपुर से मदन शर्मा, कांगड़ा से राजेश पठानिया और परमानंद शर्मा को सह संयोजक चुना गया है। बैठक में शिमला से डॉ. कुलदीप तंवर भी मौजूद हुए। बैठक में सभी ने एक स्वर में कहा कि भाजपा 2017 के अपने घोषणा पत्र में चार गुना मुआवजे के वादे को भूल चुकी है। इस कारण हिमाचल के किसानों में भारी गुस्सा है। सरकार के खिलाफ एक व्यापक प्रदेश स्तरीय भूमि-अधिग्रहण प्रभावित मंच बना कर संघर्ष तेज करना पड़ा है। मांगों को लेकर 15 सितंबर से 15 अक्तूबर के बीच प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
ये भी उठीं मांगें
- फोरलेन/रेलवे में आर्बिट्रेशन के मामले निपटाएं जाएं
- फोरलेन के साथ लगते गांवों को टीसीपी योजना से किया जाए बाहर
- टावर लाइन में भूमि अधिग्रहण की स्पष्ट नीति बने
- स्थानीय लोगों को 70 फीसदी रोजगार किया जाए सुनिश्चित
- विस्थापित दुकानदारों को मिले उचित मुआवजा
- रोड प्लान में कोई बदलाव न किया जाए
- प्रस्तावित बस स्टैंड के पास पैदल पथ या भूमिगत रास्ते बनाए जाएं
परवाणू-शिमला, कीरतपुर-मनाली, मटौर-शिमला, पठानकोट-मंडी, पिंजौर-नालागढ़, हमीरपुर-कोटली-मंडी फोरलेन प्रोजेक्ट चल रहे हैं। 63 नए राष्ट्रीय उच्च मार्ग परियोजनाओं के प्रारूप तैयार हो रहे हैं। भानुपल्ली से बिलासपुर-लेह एवं चंडीगढ़-बद्दी रेललाइन के लिए भी भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है। एयरपोर्ट निर्माण एवं विस्तार के भी भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव है। सभी परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण, 2013 कानून (पुनर्स्थापना, पुनर्वास व चार गुना मुआवजा) को हिमाचल सरकार लागू नहीं कर रही है। अब संघर्ष तेज करने की बारी है।
- बीआर कौंडल, अध्यक्ष हिमाचल भूमि-अधिग्रहण प्रभावित मंच