छात्र-अभिभावक मंच ने निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ मंगलवार को दयानंद पब्लिक स्कूल के बाहर हल्ला बोला। मंच का आरोप है कि निजी स्कूलों में फीस सहित वर्दी और किताबों के नाम पर कमीशन का गोरखधंधा चल रहा है। इसके चलते डेढ़ माह से आंदोलन किया जा रहा है। करीब दो घंटे तक दयानंद स्कूल के बाहर जुटे अभिभावकों और मंच के पदाधिकारियों ने दयानंद स्कूल में हर बार हजारों में बढ़ाई जा रही फीस और अभिभावकों को गुमराह कर वसूली के तरीके बदल-बदल कर की जा रही लूट के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
मंच संयोजक विजेेंद्र मेहरा ने एलान किया कि आंदोलन के दूसरे चरण का समापन आठ अप्रैल को मंच के शिक्षा निदेशालय में होने वाले महाधरने से होगा। आठ अप्रैल को होने वाला महाधरना निर्णायक होगा। इसमें निजी स्कूलों की फीस और शुल्क को संचालित और नियंत्रित करने के लिए ठोस नीति बनाने और फैसला लेने की मांग प्रमुखता से उठाई जाएगी।
सरकार, विभाग की खामोशी, मिलीभगत से जारी है लूट
प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ता एचएस पंवर और विवेक कश्यप ने कहा कि छात्र अभिभावक मंच के विरोध के बाद विभाग ने निजी स्कूलों को आदेश जारी किए, लेकिन अपने ही इन आदेशों को लागू करवाने में विभाग नाकाम रहा है। शहर के निजी स्कूलों ने इसी सत्र में दो से पांच हजार तक फीस बढ़ा दी है। इस पर कोई अंकुश नहीं लगा है। 18 मार्च की शिक्षा निदेशालय की अधिसूचना के बावजूद छात्रों और अभिभावकों से भारी फीसें वसूल रहे हैं। यह मिलीभगत से ही हो रहा है। सरकार और विभाग न तो कोई नीति बना पाया है और न ही उच्च न्यायालय और अपने आदेशों और राज्य के बने कानून को लागू करवा पाया है।
ऑनलाइन की आढ़ में की जा रही लूट
सोलन के एक डीएवी के अभिभावक ने कहा कि स्कूल फीस को ऑनलाइन करने की आढ़ में अभिभावक से दस हजार फीस बिना किसी मद में डाले वसूली गई है। स्कूल ने अपनी करतूतों को छुपाने के उद्देश्य से अब फीस बुकलेट देना भी बंद कर दिया है। अभिभावकों को यह बताया ही नहीं जा रहा कि पहली किस्त में दस हजार किस मद के वसूले जा रहे है।
सबसे पहले फीस ढांचा तय किया जाए
संयोजक विजेंद्र मेहरा ने सरकार से स्कूलों का फीस ढांचा तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय हिमाचल प्रदेश के निर्देशों के बाद निजी स्कूलों ने लूट का सिर्फ तरीका बदला है। फ ीस बुकलेट में हर वर्ष दाखिला फ ीस और बिल्डिंग फं ड का कॉलम हटा जरूर है लेकिन वार्षिक शुल्क, ट्यूशन फ ीस, स्मार्ट क्लास रूम फ ीस, मोबाइल मैसेज फ ीस और अन्य छोटी-छोटी सुविधाओं के नाम पर वसूली दिखाई जा रही है। अगर दाखिला फीस वसूली बंद की है, तो कुल फीस में कमी क्यों नहीं आई। जाहिर है कि सिर्फ लूट का तरीका बदला है। ड्रेस और किताबों के नाम पर सीधे और परोक्ष रूप से कमीशन का काला कारोबार जारी है।
अभिभावक महाधरने में दिखाएं ताकत
मंच ने राजधानी के सभी निजी स्कूलों में बच्चे पढ़ा रहे अभिभावकों का आह्वान किया है कि वे बेखौफ इस लूट के खिलाफ आठ अप्रैल को शिक्षा निदेशालय में होने वाले महाधरने में पहुंच कर अपनी ताकत दिखाएं और सरकार को लूट रोकने को कदम उठाने और कानून बनाने को मजबूर करें।