परिवहन विभाग की ओर से आरटीओ दफ्तरों को कैशलेस करने की मुहिम का शुरुआत में ही विरोध होना शुरू हो गया है। प्राइवेट बस ऑपरेटर यूनियन कैशलेस व्यवस्था के विरोध में उतर आई है। यूनियन का दावा है कि कैशलेस व्यवस्था ने बस ऑपरेटरों का काम बढ़ा दिया है, इसलिए इस व्यवस्था को संशोधित करके लागू किया जाना चाहिए।
आरटीओ ऑफिस में शुरू की गई कैशलेस व्यवस्था बस ऑपरेटरों को रास नहीं आ रही। बस ऑपरेटर यूनियन का तर्क है कि बहुत से बस ऑपरेटर खुद ही बसों में परिचालक का काम भी करते हैं। ऐसे में कैशलेस व्यवस्था के कारण अब ऑपरेटरों को गाड़ी छोड़ कर आरटीओ ऑफिस पहुंचना पड़ेगा। टैक्स और फीस जमा करने के लिए अपना कार्ड किसी को देना भी खतरे से खाली नहीं है, इसमें ठगी का खतरा है।
रिश्वतखोरी खत्म करने के नाम पर पूरी व्यवस्था को कैशलेस करना समाधान नहीं है। निगरानी बढ़ा कर ही रिश्वतखोरी खत्म की जा सकती है। यूनियन ने कैशलेस व्यवस्था को संशोधित रूप में लागू करने की मांग उठाई है। ऑपरेटरों की मांग है कि हर माह जमा होने वाले टैक्स को कैशलेस व्यवस्था से बाहर रखा जाए।
कैशलेस से बढ़ गया ऑपरेटरों का काम : अमित
आरटीओ ऑफिस को कैश लेस करके बस ऑपरेटरों का काम बढ़ा दिया गया है। हर महीने जमा होने वाले टोकन टैक्स और एसआरटी कैश जमा करवाने की छूट दी जानी चाहिए। भले ही पांच साल में एक बार जमा होने वाली परमिट फीस और स्पेशल परमिशन कार्ड से जमा करवाने की व्यवस्था कर दी जाए। - अमित चड्ढा, महासचिव, शिमला प्राइवेट बस आपरेटर यूनियन
प्रदेश सरकार से मामला उठाएगी यूनियन
शिमला प्राइवेट बस ऑपरेटर यूनियन आरटीओ ऑफिस को कैशलेस करने की व्यवस्था संशोधित तरीके से लागू करने की मांग प्रदेश सरकार के समक्ष उठाएगी। इसके लिए यूनियन का प्रतिनिधिमंडल जल्द मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री से मुलाकात करेगा।