आरएसएस से जुड़ी संस्था को शहर के बीचोंबीच 30 बीघा जमीन देने के लिए एनओसी देने का भाजपा शासित नगर निगम का फैसला रद्द हो सकता है। ज्यादातर पार्षदों के लिखित विरोध के बाद सदन का यह फैसला बदला सकता है। निगम आयुक्त अगले हफ्ते इस मामले पर विधि अधिकारियों के साथ बैठक कर चर्चा करने वाले हैं।
अधिकारियों से पूछा जाएगा कि किन परिस्थितियों में सदन का फैसला रद्द किया जा सकता है। ज्यादातर पार्षद सदन से गैर मौजूदगी के बावजूद प्रस्ताव पारित होने का जो दावा कर रहे हैं, वह कितना सही है। नियमानुसार सदन से पारित किया कोई भी फैसला टालना आसान नहीं होता।
लेकिन यदि आधे से ज्यादा पार्षद लिखित में अपना विरोध दर्ज करवाए तो फैसला बदला जा सकता है। प्रस्ताव को लेकर निगम ने 31 जुलाई को हुई मासिक बैठक के दौरान ही लिखित में विरोध दर्ज करवाने को कहा था। 34 में से 18 पार्षदों ने इसमें हस्ताक्षर किए हैं। इनमें 15 विपक्षी और तीन भाजपा के पार्षद हैं। ऐसे में प्रस्ताव रद्द होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
पलटी नहीं मार पाएंगे भाजपा पार्षद
संस्था को एनओसी देने के प्रस्ताव के खिलाफ तीन भाजपा पार्षदों ने हस्ताक्षर किए हैं। इनमें आरती चौहान, सत्या कौंडल और रेनु चौहान शामिल हैं। विरोध दर्ज करवाने के लिए बाकायदा वोटिंग की थी। भरे सदन में लिखित लेटर पर इन तीन पार्षदों ने हस्ताक्षर किए हैं। ऐसे में यदि यह पार्षद फर्जी हस्ताक्षर का दावा कर पलटी नहीं मार सकते। आयुक्त के साथ होने वाली बैठक में तय किया जाएगा कि प्रस्ताव रद्द करना है या दोबारा वोटिंग के लिए इसे सदन में लाना है।
जमीनें बेचने की बजाय सुविधाएं दें : नंदा
कांग्रेस ने इस प्रस्ताव पर भाजपा शासित नगर निगम को आड़े हाथों लिया है। यूथ कांग्रेस महासचिव सिमी नंदा ने कहा कि नगर निगम शहर की जमीन बेचने के बजाय लोगों को सुविधाएं देने के लिए काम करें। कहा कि जनता को शहर में पार्क और पार्किंग की जरूरत है। पर्यटन स्थल विकसित कर शिमला को सुंदर बनाया जा सकता है। लेकिन निगम आरएसएस और दूसरी संस्थाओं को कीमतें जमीन दे रहा है।