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पार्क और पार्किंग तो दूर, मज्याठ वार्ड में एक शौचालय तक नहीं

Mon, 09 Jul 2018 11:45 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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शहर का वार्ड नंबर सात मज्याठ एक ऐसा इकलौता वार्ड है, जहां प्रॉपर्टी टैक्स के रूप में नगर निगम को हर साल कमाई तो लाखों में होती है लेकिन सुविधाएं एक भी नहीं है। पार्क-पार्किंग, एंबुलेंस रोड और खेल मैदान तो छोड़िए, पूरे वार्ड में एक भी सार्वजनिक शौचालय और रेन शेल्टर तक की सुविधा नहीं है।

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हेरिटेज रेल ट्रैक पर टॉय ट्रेन इसी वार्ड से शिमला में दाखिल होती है लेकिन सफाई व्यवस्था ऐसी है कि सैलानियों का स्वागत कूडे़ के ढेर से होता है। करीब छह हजार की आबादी वाले इस वार्ड में 90 फीसदी से ज्यादा घर आज तक सीवरेज लाइन से नहीं जुड़े हैं। बरसात आते ही लोग नालों में सीवेज टैंक खोल देते हैं।

चैनलाइजेशन न होने से नालों का गंदा पानी सड़कों और रास्तों पर बहता रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब निगम उन्हें एक भी सुविधा नहीं दे पा रहा तो टैक्स किस बात का वसूल रहे हैं। अमर उजाला की टीम ने रविवार को वार्ड का दौरा किया तो लोगों ने नगर निगम के मूलभूत सुविधाएं देने के दावों की हवा निकाल दी।
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लोगों से बातचीत
1. ज्यादातर घरों में सीवरेज लाइन नहीं
वार्ड के ज्यादातर घर आज तक सीवरेज लाइन से नहीं जुड़े हैं। इसके अलावा पूरे वार्ड में एक भी सार्वजनिक शौचालय नहीं है। दिक्कतें हजार हैं, लेकिन निगम सुविधाएं देने को तैयार नहीं।
-संतराम शर्मा

2. सफाई ठप, डंपर तक नहीं लगे
इलाके में सफाई व्यवस्था ठप है। कहीं डंपर भी नहीं लगा, जहां लोग कूड़ा फेंक सकें। निगम को सड़क किनारे कूड़ेदान रखने चाहिए, जिससे लोग सड़कों पर कूड़ा फेंकने की जगह इसमें डाल सकें। -नरेंद्र ठाकुर

3. लाइटें खराब, रात को परेशानी
कई जगह स्ट्रीट लाइटें खराब हैं। वहीं, पैदल रास्तों की भी हालत ठीक नहीं। रात को पैदल चलने वाले लोगों को दिक्कतें होती हैं। सड़क किनारे रेन शेल्टर की भी सुविधा होनी चाहिए। -हरिंद्र कश्यप

4. पूरे महीने में सिर्फ दो-तीन दिन सफाई
सफाई व्यवस्था ठप है। महीने में दो-तीन दिन ही झाड़ू लगता है। निगम वाले हमसे पैसे तो पूरे लेते हैं, लेकिन सुविधा के नाम पर कूड़ा तक नहीं उठाते। पार्षद भी व्यवस्था देखने नहीं आ रहे। -मीना देवी

5. रास्ते खस्ताहाल, पानी की भी दिक्कत
ज्यादातर रास्ते कच्चे हैं। वार्ड के अंदर तक रोड नहीं तो इन्हीं रास्तों से चलना पड़ता है। नगर निगम को कम से कम रास्ते तो पक्के करने चाहिए। पानी के लिए भी कई बार जूझना पड़ता है।-नीलम शर्मा

6. खंभे तो लगे, लेकिन लाइटें नहीं
हैंडपंप से श्मशानघाट तक पोल तो लगे, लेकिन लाइटें नहीं लगीं। बाजार में स्पीड ब्रेकर नहीं हैं। इसके अलावा पानी आने का भी कोई टाइम नहीं है। पुलिस को रात्रि गश्त बढ़ानी चाहिए। -आरएल डोगरा

7. एंबुलेंस रोड नहीं, पार्क-पार्किंग तो भूल जाएं
इस वार्ड में एक भी एंबुलेंस रोड नहीं है। बीमार लोगों को उठाकर नालागढ़ सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। पार्किंग, पार्क और खेल मैदान जैसी सुविधाएं तो भूल ही जाइए। मूलभूत सुविधाएं गायब हैं। -दीवेश डोगरा

8. ड्रेनेज खस्ताहाल, खुले में बहते हैं नाले
सैकड़ों घर होने के बावजूद ड्रेनेज सिस्टम नहीं सुधारा है। नाले खुले में बहते हैं। इससे बीमारियां फैलने का भी खतरा पैदा हो गया है। वार्ड में एक भी नाले का चैनलाइजेशन नहीं किया गया है।-हुक्मचंद

9. रास्ते कच्चे, कम्युनिटी सेंटर तक नहीं
ज्यादातर रास्ते कच्चे हैं। नगर निगम इन्हें पक्का नहीं कर रहा। स्थानीय लोगों के लिए सामुदायिक केंद्र तक की सुविधा नहीं है। नगर निगम जब टैक्स लेता है तो सुविधाएं भी तो दें। -संदीप शर्मा

10. सड़क पर खड़ी करते हैं गाड़ी
वार्ड में एक भी पार्किंग नहीं बनी है। यहां जिन लोगों के पास गाड़ियां हैं, उन्हें मेन सड़क पर ही गाड़ियां पार्क करनी पड़ती हैं। सीवरेज लाइन का तो पूछिए मत, इसका कोई अता-पता नहीं। -सुभाष कौंडल

11. सीवरेज से भर जाते हैं नाले
ज्यादातर घरों में अपने ही सीवरेज टैंक बने हैं। बरसात का मौसम शुरू होते ही सभी लोग टैंक खाली करने के लिए नालों में इन्हें खोल देते हैं। इससे साथ लगते घरों के लोग परेशानी झेल रहे हैं।-राधेश्याम शर्मा

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