अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। सरकारी महकमों के अफसरों को चुनाव के समय भी गाड़ी का मोह नहीं छूट रहा। चुनावी ड्यूटी की बजाय सरकारी गाड़ियों का इस्तेमाल अपने लाडलों को स्कूल भेजने के लिए किया जा रहा है। हालत यह है कि कई महकमे जिला निर्वाचन आयोग से दिशानिर्देश मिलने के हफ्ते के बाद भी अपनी गाड़ियां चुनाव ड्यूटी के लिए नहीं भेज रहे हैं। मजबूरन जिला निर्वाचन आयोग को अब सख्ती बरतनी पड़ी है। वीरवार को तीन महकमों को कारण बताओ नोटिस तक जारी किए गए हैं। वहीं, कई महकमों को चेतावनी भी दी गई है जो नियमित गाड़ियां नहीं भेज रहे हैं।
चुनाव के समय निर्वाचन आयोग को कर्मचारियों को एक जगह से दूसरी जगह भेजने, मशीनें शिफ्ट करने, फ्लाइंग स्कवॉयड और पार्टियों के प्रचार पर निगरानी रखने के लिए गाड़ियों की जरूरत पड़ती है। इसके लिए सभी सरकारी महकमों को मतदान तक गाड़ियां भेजने के निर्देश जारी किए जाते हैं लेकिन कई महकमे इन्हें नहीं मान रहे हैं। गाड़ियां चुनाव ड्यूटी में न लगें, इसके लिए बाकायदा सिफारिशें की जा रही हैं। कसुम्पटी विधानसभा क्षेत्र की रिटर्निंग ऑफिसर ज्योति राणा ने बताया कि जिन विभागों ने अभी तक गाड़ियां नहीं भेजी हैं, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
ड्यूटी से भाग रहे कर्मचारी
चुनावी ड्यूटी से भी कर्मचारी भाग रहे हैं। शिमला शहरी, ग्रामीण और कसुम्पटी विधानसभा सीटों में तैनात किए गए करीब 500 कर्मचारी ड्यूटी न करने के लिए आवेदन कर चुके हैं। कई कर्मचारी जहां बीमारी का बहाना लगाकर ड्यूटी नहीं करना चाहते तो कई जरूरी काम का हवाला दे रहे हैं। उधर, जिला निर्वाचन आयोग ने ज्यादातर कर्मचारियों के आवेदन रद्द कर दिए हैं।