खलीनी बस हादसे के बाद शिमला शहर में येलो लाइन लगाने का मामला फिर लटक गया। येलो लाइन लगाने से जुड़ी फाइल नगर निगम ने जिला प्रशासन को भेजी थी उसे उपायुक्त ने कुछ आपत्तियां लगाकर वापस निगम को लौटा दिया है। जिला प्रशासन का कहना है कि निगम की ओर से आधी अधूरी फाइल भेजी थी। इसमें अभी और जानकारी मांगी है। प्रशासन का कहना है कि येलो लाइन के लिए एक कमेटी का गठन किया था जिसमें पुलिस, लोक निर्माण विभाग, नगर निगम और एसडीएम को शामिल किया था।
इन्हें संयुक्त तौर पर येलो लाइन के लिए मौके का मुआयना करना था और एक संयुक्त रिपोर्ट तैयार करनी थी। जिला प्रशासन का कहना है कि नगर निगम ने इसे दरकिनार कर केवल अपनी रिपोर्ट ही भेज दी। फाइल में कमेटी की रिपोर्ट नहीं लगाई गई। येलो लाइन जिस जगह पर लगाई जानी है, वहां से दो गाड़ियां क्रास होना जरूरी है। इससे संबंधित कोई सर्टिफिकेट भी नगर निगम ने नहीं भेजा। नगर निगम ने शहर के बंधित और प्रतिबंधित सड़कों पर भी येलो लाइन प्रस्तावित कर दी जो नियमों के मुताबिक मुमकिन नहीं है।
इन सड़कों पर परमिट धारकों की गाड़ियां भी खड़ी नहीं हो सकती। सामान्य गाड़ियां तो दूर की बात है, क्योंकि रोड परमिट पिक एंड ड्राप के लिए जारी किए जाते हैं। कोई भी गाड़ी वहां पार्क नहीं हो सकती। डीसी अमित कश्यप ने कहा कि फाइल में कुछ आपत्तियां थीं लिहाजा उन्हें दुरुस्त करवाने के लिए नगर निगम को लौटा दिया है। जल्द सभी आपत्तियां दूर करने को कहा है। एमसी आयुक्त ने कहा कि येलो लाइन पार्किंग को लेकर जिला प्रशासन को भेजी फाइल पर कुछ और जानकारी निगम से मांगी गई है। निगम जल्द यह जानकारी मुहैया करवाएगा। शहर में जल्द ही येलो लाइन लगाने का काम शुरू कर देंगे।