हिमाचल विश्वविद्यालय के यूआईआईटी (यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी) संस्थान में अब स्कूलों की तर्ज पर वर्दी बेचने के लिए काउंसलिंग के समय ही दो कारोबारी बिठाकर छात्रों की ड्रेस का नाप देने का चलन भी शुरू कर दिया है। संस्थान ने पांचों डिग्री कोर्स में इस बार प्रवेश लेने वाले करीब 365 छात्र-छात्राओं को एक अगस्त तक हर हाल में ड्रेस बनवाने का फरमान जारी किया है। पुराने छात्र भी ड्रेस बनवाएंगे।
यही नहीं इस फरमान के साथ ही संस्थान के कैंपस में ही संस्थान निदेशक द्वारा बनाई शिक्षकों की कमेटी ने दो कारोबारियों से 2800 रुपये में क्वालिटी का कपड़ा और सिलाई का रेट तय कर हर छात्र का नाप लेने की इजाजत भी दे दी। हालांकि पहले यह सब निजी शिक्षण संस्थानों और स्कूलों में होता था तथा इसका छात्र अभिभावक विरोध भी करते रहे। अब यह सरकारी विश्वविद्यालय के संस्थान में शुरू हो गया है। इसका कुछ छात्र यह कहकर विरोध भी करने लगे है कि विभाग क्यों तय करेगा कि उसे कहां से कितनी कीमत पर ड्रेस खरीदनी है। संस्थान को ड्रेस चाहिए तो छात्र अपने स्तर पर बनवा लेगा।
किसी छात्र को नहीं उन्हीं से ड्रेस लेने की बाध्यता नहीं-निदेशक
संस्थान के निदेशक प्रो. पीएल शर्मा ने कहा कि कमेटी ने छात्रों की सुविधा और पैसे की बचत को देखते हुए यह निर्णय लिया था। इससे ड्रेस में भी एक रूपता आएगी।इसलिए 2800 रुपये में प्रीमियम की जगह ट्रू वैल्यू क्वालिटी के कपड़े की ड्रेस बनवाने को दो ट्रेडर को अधिकृत किया है। प्रो. शर्मा ने कहा कि इसमें किसी छात्र पर बाध्यता नहीं है कि उन्हीं से ड्रेेस बनवाए। एक अगस्त को सेशन शुरू होेने तक छात्रों को हर हाल में ड्रेस बनावानी ही होगी। यूजी कोर्स संस्थान होने पर सप्ताह में तीन दिन ड्रेस अनिवार्य की गई है।