..मिष्टी उठ जा दूध पी ले, स्कूल जाना है। सुबह पौने छह बजे मिष्टी की मां मीरा बेटी को घर में तलाशते हुए कुछ इसी तरह आवाजें लगाती रहीं। ..कहां गई मेरी मिष्टी, भगवान ने मेरे साथ ही ऐसा क्यों किया, अब किसको दूध पिलाऊं, किसके लिए लंच पैक करूं। बेटी की मौत के बाद मीरा बेसुध है। दादी मिष्टी की तस्वीर सीने से लगा कर रोती रहीं। झंझीड़ी बस हादसे का शिकार हुई मेहल को घर में परिजन मिष्टी कहकर बुलाते थे।