दोनों पार्षदों में जमकर बहस हुई। निजी मामलों को भी सदन में उछाला गया। पार्षद अर्चना धवन ने टेबल पीटना शुरू कर दिया। पार्षद समझाने लगे लेकिन वह नहीं मानीं। पार्षद सिमी नंदा, राकेश चौहान ने पूछा कि जब अफसरों ने इसका काम शुरू किया तो स्थानीय पार्षद से क्यों नहीं पूछा गया?
किसी को प्राइज, किसी को सरप्राइज वाले मामले पर जब हंगामा नहीं थमा तो चार बजे मेयर ने सदन दस मिनट के लिए स्थगित कर दिया। दोबारा सदन चलने पर भी हंगामा नहीं थमा।
पार्षद शैलेंद्र चौहान, सत्या कौंडल, राकेश चौहान, कमलेश मेहता, शैली शर्मा और दिवाकर शर्मा ने कहा कि सभी पार्षद अपने वार्डों में काम करें, दूसरे के एरिया में हस्तक्षेप न करें। पेयजल कंपनी के प्रबंध निदेशक धर्मेंद्र गिल ने कहा कि प्रोजेक्ट बेनमौर के पूर्व पार्षद ही लाए थे, 2018 में इसी सदन ने इसे मंजूरी दी है।
लेकिन वर्तमान में यह जाखू वार्ड में बन रहा है। इसके लिए फॉरेस्ट क्लीयरेंस चाहिए। अर्चना धवन ने कहा कि वह इसे क्लीयरेंस दिलाएंगी। काम बंद नहीं होगा। तय हुआ कि जाखू पार्षद ही इस प्रोजेक्ट का काम करवाएंगी। हालांकि, किमी सूद ने इस पर भी आपत्ति जताई।