हिमाचल विश्वविद्यालय में प्रदेश सरकार द्वारा आडिट करवाने के लिए स्थापित की (एलएडी) की अलग शाखा के खिलाफ बुधवार को विवि कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। यही नहीं उग्र कर्मचारियों ने शाखा के दरवाजा पर जबरन ताला भी जड़ दिया। कर्मचारियों का आरोप है कि एलएडी जानबूझ कर कर्मचारियों के बिलों पर आपत्ति लगाकर परेशान कर रहा है।
विवि में जब इंटनरल ऑडिट की व्यवस्था है तो फिर एलएडी की क्या जरूरत? इसे हटाकर वापस भेजने की मांग को लेकर विवि कर्मचारियों के नुमाइंदों और आम कर्मचारियों ने प्रशासनिक भवन परिसर के बाहर प्रदर्शन किया।
हंगामा होने पर विवि के कुलसचिव घनश्याम चंद भी मौके पर पहुंचे। इनसे कर्मचारियों ने मांग की कि एलएडी को वापस सरकार के विभाग में भेजा जाए। अधिकारी संघ के अध्यक्ष राज कुमार की अध्यक्षता में हुए इस प्रदर्शन में शामिल कुछ कर्मचारी नेताओं ने एलएडी शाखा में ताला लगाने का कार्य भी किया। सुबह साढ़े ग्यारह से लेकर करीब दो बजे तक चले इस हंगामे में सभी कर्मचारी शामिल हुए। कर्मचारियों का आरोप था कि एलएडी बेवजह कर्मचारियों से जुड़े जरूरी बिलों और निर्माण विंग से संबंधित कार्यों के बिलों, मानदेय, परीक्षा विंग के वेतन पर आपत्तियां लगाकर कर्मचारियों को परेशान कर रहा है।
इससे विवि का काम प्रभावित हो रहा है। इस पर कुलसचिव ने भरोसा दिया कि उनकी मांग पर जल्द उचित कदम उठाया जाएगा। कर्मचारियों का आरोप था कि शाखा पूरी तरह से खाली पड़ी थी लेकिन जानकारी के मुताबिक शाखा में चार कर्मचारी प्रदर्शन के समय मौजूद थे। इस शाखा में ज्वाइंट कंट्रोलर, डिप्टी कंट्रोलर के साथ ही करीब छह से सात सहयोगी स्टाफ जिसमें आडिटर, एसओ और क्लर्क भी बैठते है।
सरकार ने बिठाया है एचपीयू में एलएडी की व्यवस्था
नब्बे के दशक में प्रदेश सरकार ने विवि को प्रदेश सरकार की ओर से जारी होने वाली राशि और अन्य संस्थाओं से आने वाली राशि को व्यय किए जाने के मामलों तथा अकाउंटस की जांच करने को लोकल आडिट की अलग से शाखा बिठाई थी।
पहले कर्मचारियों का वेतन भी विवि देता था लेकिन 2007 के बाद प्रदेश सरकार ही वेतन का खर्च वहन करती है। यह कर्मचारियों को शुरू से ही रास नहीं आ रहा था। इसलिए बार-बार कर्मचारी विवि से एलएडी को हटाने की मांग करते आ रहे हैं। विवि का हालांकि अपना इंटरनल आडिट भी है, एजी अलग से आडिट करता है । उस पर एलएडी भी अपने स्तर पर ऑडिट करता है।