अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जाखू में चालीस लाख रुपये की लागत से बन रहे रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रोजेक्ट पर संकट मंडरा गया है। वार्ड पार्षद अर्चना धवन ने प्रोजेक्ट स्थल पर धरना देने और काम रोकने की चेतावनी दी है।
वहीं, फोरेस्ट क्लीयरेंस लिए बिना प्रोजेक्ट शुरू करने को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि प्रोजेक्ट बनाने के लिए जिस ठेकेदार को टेंडर अवॉर्ड किया गया है, वह लेबर के साथ काम के लिए तैयार है। लेकिन बिना फोरेस्ट क्लीयरेंस और अब पार्षदों के विवाद से प्रोजेक्ट लटक सकता है। उधर, पार्षद अर्चना धवन का कहना है कि जब तक भाजपा पार्षद इस प्रोजेक्ट से पीछे नहीं हटती तब तक यह काम शुरू नहीं होगा। कहा कि वह प्रोजेक्ट के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन दूसरे वार्ड की भाजपा पार्षद का उनके क्षेत्र में हस्तक्षेप करना और प्रोजेक्ट का काम करवाना कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कहा कि प्रोजेक्ट को जब क्लीयरेंस तक नहीं मिली तो फिर पार्षद ने किस काम के लिए भागदौड़ की है।
अफसरों ने साधी चुप्पी
पार्षदों में बढ़ते विवाद के बाद नगर निगम और पेयजल कंपनी के अफसरों ने चुप्पी साध ली है। सभी इस विवाद से किनारा करने लगे हैं। अधिकारी मान रहे हैं कि यह प्रोजेक्ट जाखू वार्ड का है लेकिन प्रोजेक्ट के लिए काम बैनमोर पार्षद ने किया है। फोरेस्ट क्लीयरेंस पर भी अधिकारी स्पष्ट जवाब नहीं दे पा रहे। 19 जून को पेयजल कंपनी के प्रबंध निदेशक धर्मेंद्र गिल शिमला पहुंचेंगे। इसके बाद तय होगा कि इस प्रोजेक्ट का क्या करना है।
पहले ही काफी लेट हो चुका है प्रोजेक्ट
अम्रुत मिशन के तहत बन रहे इस प्रोजेक्ट में करीब एक साल की देरी हो चुकी है। पहले टेंडर के लिए कोई ठेकेदार नहीं मिला। दूसरे टेंडर में जिस ठेकेदार ने आवेदन किया उसे पिछले साल 6 नवंबर 2018 को यह काम अवार्ड हो चुका है। इसके बाद ठेकेदार साइट पर पहुंच गया लेकिन नगर निगम साइट क्लीयर कर इसे ठेकेदार को नहीं दे पाया।
मेरे समय में बना था प्रोजेक्ट
बैनमोर वार्ड के पूर्व पार्षद अनूप वैद्य ने कहा कि यह प्रोजेक्ट उनके समय में तैयार किया था। कहा कि निगम की बायोडायवर्सिटी कमेटी के अध्यक्ष होने के नाते उन्होंने यह प्रस्ताव दिया था। पूर्व पार्षद ने कहा कि दोनों पार्षद इस मामले पर विवाद न बढ़ाएं और आपस में बैठकर बातचीत करें।