इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू नहीं हो पाई। दावा था कि अप्रैल में पहला ट्रांसप्लांट कर दिया जाएगा, लेकिन पौने दो माह बाद भी न तो ऑपरेशन हो पाए और न ही अलग से ऑपरेशन थियेटर व आईसीयू बन सका। इस सुविधा से अभी तक प्रदेश की जनता वंचित है। हालांकि पीजीआई चंडीगढ़ भेजे गए डॉक्टर, स्टाफ नर्सें और तकनीशियन ट्रेनिंग लेकर लौट आए हैं।
आईजीएमसी में अब तक किडनी ट्रांसप्लांट न होने से मरीजों को पीजीआई और निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। इसमें मरीजों के लाखों रुपये खर्च होतेे हैं। सालभर में करीब 20 से 25 मरीज बाहरी राज्यों में किडनी ट्रांसप्लांट करवाते हैं। प्रदेश सरकार ने इसको लेकर पॉजिटिव रुख अपनाया और इसे जल्द शुरू करने का दावा भी किया था लेकिन लेटलतीफी से मरीज परेशान हैं।
जून माह भी शुरू होने को है लेकिन ट्रांसप्लांट को लेकर अभी तक कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। हालांकि दावा किया जा रहा है कि मरीज की लिस्ट तैयार की है। सवाल उठता है कि जब तक अलग से ऑपरेशन थियेटर और आईसीयू की सुविधा नहीं होगी तो ट्रांसप्लांट कैसे होगा? इस बात का जवाब न तो अस्पताल प्रबंधन और न ही सरकार के पास है।
जल्द शुरू हो जाएगा किडनी ट्रांसप्लांट
आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जनकराज ने कहा कि अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट को लेकर सारे कार्य पूरे किए जा चुके हैं। जल्द यह सुविधा शुरू कर दी जाएगी।
पहले भी टूट चुका है सपना
वर्ष 2013 में किडनी ट्रांसप्लांट सेंटर बनाने की घोषणा हुई थी तथा बजट भी जारी हुआ लेकिन आईजीएमसी ने गंभीरता नहीं दिखाई। लिहाजा जारी बजट को ब्याज समेत लौटाना पड़ा। अब सरकार ने इसे शुरू करने के लिए चार करोड़ का बजट मुहैया करवाया है लेकिन किडनी ट्रांसप्लांट सेवा शुरू नहीं हो पाई।
किडनी विशेषज्ञ करेंगे ऑपरेशन
एम्स के डॉ. बंसल किडनी ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ हैं। सरकार ने इन्हीं डॉक्टर से ऑपरेशन करवाने की बात की कही है। आईजीएमसी में यही डॉक्टर किडनी ट्रांसप्लांट करेंगे। दावा किया था कि एक महीने तक अस्पताल में इनकी सेवाएं ली जाएंगी। इनसे ट्रेनिंग करके आए डॉक्टर, नर्सें और पैरामेडिकल स्टाफ को ट्रांसप्लांट को लेकर और प्रशिक्षण मिलना था।