अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। ब्लड प्रेशर एक खतरनाक बीमारी है। इस बीमारी को डॉक्टरी भाषा में साइलेंट किल्लर भी कहा जाता है। आईजीएमसी में रोजाना सौ की ओपीडी में 30 से 40 मरीज इस बीमारी से पीड़ित पाए जा रहे हैं। बीमारी के चपेट में आने के बाद कई मरीजों को डॉक्टर दाखिल भी कर रहे हैं।
विशेषज्ञ डॉक्टरों का कहना है कि 20 से 30 वर्ष की आयु के लोगों को भी अब बीमारी अपनी गिरफ्त में ले रही है। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि व्यक्ति का लाइफ स्टाइल सही नहीं है। ऐसे लोगों को छह महीने और एक साल में बीपी का चेकअप करवाना चाहिए। आईजीएमसी मेडिसन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. दलीप गुप्ता ने यह जानकारी दी है। इस बीमारी के रिस्क फैक्टर अधिक होते हैं। हार्ट की बीमारी इससे हो सकती है। इसके अलावा विशेषज्ञ का कहना है कि घी, अचार, डाइट कंट्रोल और स्मोकिंग भी बीपी बढ़ने का मुख्य कारण है। जिन मां-बाप को पहले से ही यह बीमारी है, उनकी संतानों को भी इस बीमारी की चपेट में आने की आशंका अधिक बनी रहती है। इस बीमारी के कारण व्यक्ति के शरीर में विटामिन बी और सी में भी कमी आ जाती है। कम नींद लेने से किडनी खराबी और अत्यधिक दवाइयाें का सेवन आदि रक्तचाप का कारण बन सकती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति इस बीमारी की चपेट में आते हैं तो उन्हें तुरंत अस्पताल में चेकअप करवाना चाहिए।
इनसेट
ब्रेन अटैक भी हो जाता है
मरीज को बीपी होने पर इलाज के दौरान कई खतरे पैदा होने की संभावना रहती है। डॉक्टरों का कहना है कि बीपी के कारण मरीज को ब्रेन अटैक हो सकता है और हार्ट की बीमारी भी हो सकती है। हालांकि, बीपी सामान्य तौर पर पहले 40 से 50 की उम्र के बाद होता था। लेकिन जीवनशैली में बदलाव के कारण अब छोटी उम्र में ही यह बीमारी होने लगी है।
अगर व्यक्ति को गुर्दे और थायरायड की बीमारी होती है। ऐसे मरीजों को उपचार से पहले टेस्ट किए जाते हैं जिससे बीमारी को अत्यधिक सावधानी बरतकर उपचार दिया जा सके। बीपी की बीमारी होने पर मरीज को देखने, हॉर्ट और ब्लीडिंग जैसी समस्याएं होती हैं।
ऐसे कंट्रोल में लाए बीपी
बीपी को कंट्रोल में लाने के लिए नियमित चेकअप करवाएं। जबकि, व्यायाम और नमक का कम सेवन करना चाहिए। इसके अलावा आहार में फल तथा सब्जियां भी खाएं।