धर्मशाला। आने वाले समय में प्रदेश में ऊनी वस्त्र बनाने के लिए बुनकरों को ऊन की कमी खल सकती है। साथ ही प्रदेश में ऊनी वस्त्र के कुटीर एवं लघु उद्योग को भी धक्का लग सकता है। प्रदेश भर में भेड़पालकों को भेड़ों से ऊन निकालने वाले नहीं मिल रहे हैं। इसके चलते भेड़ों के शरीर पर चड़ी ऊन जहां खराब हो सकती है। वहीं, भेड़ों को गंभीर बीमारियां भी चपेट में ले सकती हैं।
भेड़ पालकों की मानें तो पूर्व में वूल फेडरेशन के माध्यम से भेड़ों से ऊन निकालने के लिए वॉलंटियर भेजे जाते थे। ये वॉलंटियर प्रति भेड़ ऊना निकालने के पैसे लेकर समय पर भेड़ों पर चड़ी ऊन निकालते थे। यह पूरा काम गर्मियां आने से पहले हो जाता था, लेकिन, इस बार अभी तक एक वॉलंटियर भेड़ों से ऊन निकालने के लिए नहीं भेजा गया है। भेड़ों से ऊन न निकाले जाने से भेड़पालकों को आर्थिक हानि उठानी पड़ रही है।
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करीब एक दर्जन वॉलंटियार हड़ताल पर
वूल फेडरेशन के तहत भेड़ों से ऊन निकालने का काम करने वाले वॉलंटियर अपनी मांगों को हड़ताल पर हैं। ऐसे भेड़ पालकों को भेड़ों से ऊन निकालने के लिए परेशानी हो रही है।
साल में तीन बार निकाली जाती है ऊन
भेड़ पालकों का कहना है कि अक्तूबर, फरवरी और मई में साल में तीन बार एक भेड़ से ऊन निकाली जा सकती है। यदि समय पर ऊन न निकाली जाए, तो इसकी क्वालिटी में कमी के साथ यह झड़ने शुरू हो जाती है। वहीं, भेड़ों के मरने की स्थिति भी बन जाती है। इसके अलावा जंगलों में चरने के लिए जाने पर भेड़ें कई बार झाड़ियों में फंस जाती हैं।
सरकार उठाई जाएगी मांग
एनएसयूआई के राष्ट्रीय सचिव एवं गद्दी युवा नेता सुरजीत भरमौरी ने बताया कि उनके पास दर्जनों भेड़पालकों ने इस संबंध में शिकायत दी है। मामले को प्रदेश सरकार के समक्ष पुरजोर से रखा जाएगा। इससे कि भेड़पालकों की समस्या का हल हो सके।
कोट
फेडरेशन ने तीन वॉलंटियर्स को अनुबंध पर लाने की शर्त मान ली है। साथ ही अन्यों के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा है। एक सप्ताह के अंदर भेड़ पालकों की समस्या का हल हो जाएगा।
- रघुबीर सिंह ठाकुर, अध्यक्ष हिमाचल प्रदेश वूल फेडरेशन