सत्ता पक्ष ने ध्वनिमत से संशोधित विधेयक को पारित किया।संशोधित विधेयक पर चर्चा करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि मंदिरों के चढ़ावे को किसी भी अन्य कार्य पर खर्च नहीं किया जाना चाहिए।
विधेयक में किया गया यह संशोधन अफसरों की औरंगजेब सोच का नतीजा है। उन्होंने कहा कि गो संरक्षण की जिम्मेवारी मंदिरों पर डालने का मतलब है कि हम स्वयं गरीब हो गए हैं। मंदिर कमेटियों के अपने बहुत अधिक खर्च होते हैं।
मंदिरों के कई हित धारक होते हैं। ऐसे में यह मामला विवादित हो जाएगा, सरकार को यह मामला संभालना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का अपना पशुपालन विभाग है। इस विभाग के माध्यम से सरकार को गोवंश संरक्षण के लिए कदम उठाने चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने मंदिरों को इस मामले से दूर रखने की मांग की। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के सवालों के जवाब में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि मंदिरों का पैसा कई अन्य जगह खर्च किया जा रहा है। हमारी सरकार गोवंश के लिए इसका इस्तेमाल करने जा रही है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष के सुझावों और आपत्तियों में विरोधाभास है। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह जहां संशोधन के प्रति विरोध दर्ज करवा रहे हैं, वहीं कांग्रेस विधायक सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने 25 फीसदी चढ़ावा गोवंश के लिए देने का सुझाव दिया है। मुख्यमंत्री की इस बात पर सदन में खूब ठहाके भी लगे।
ज्वालामुखी के भाजपा विधायक रमेश धवाला ने बुधवार को ज्वालामुखी अस्पताल सराय भवन में चलने का मामला सदन में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाते हुए उठाया।
इस पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री विपिन सिंह परमार ने जवाब दिया कि प्रदेश सरकार की ओर से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ज्वालामुखी में 50 बिस्तरों से 100 बिस्तरों वाले अस्पताल में स्तरोन्नत कर दिया गया है।
इस भवन का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। यह नींव कार्य के स्तर पर रुका है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ज्वालामुखी का पुराना भवन बस स्टैंड के साथ स्थित है। वहां वर्तमान में उपमंडलाधिकारी और तहसीलदार का कार्यालय संचालित हैं।
इस भूमि पर टैक्सी स्टैंड के भवन का निर्माण भी प्रगति पर है। 100 बिस्तरों वाला नागरिक अस्पताल ज्वालामुखी मातृ छाया और यात्री निवास भवन में संचालित है। उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर सरकार की ओर से आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।