शिमला। माकपा ने नगर निगम की दुकानों का किराया बढ़ाए जाने के फैसले के खिलाफ शनिवार को उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। माकपा ने कहा कि निगम द्वारा लिया यह फैसला जनविरोधी है। प्रदर्शन में माकपा ने महापौर पर आरोप लगाया कि उन्होंने हित धारकों से बिना पूछे और आपसी सहमति को लेकर बैठक तक नहीं की। इसके चलते शहर के सैकड़ों दुकानदार और व्यापारी परेशानी में हैं। प्रदर्शन में राज्य सचिव ओंकार शाद और शिमला शहरी कमेटी के सचिव बलबीर पराशर ने आरोप लगाया कि कोई भी व्यापारी या दुकानदार किरायों को बढ़ाना नहीं चाहता है लेकिन नगर निगम के जल्दबाजी में लिए गए फैसले से अब दुकानदार और व्यापारियों को दिक्कतें झेलनी पड़ रहा है।
विजेंद्र मेहरा ने कहा कि भाजपा शासित निगम में स्थिति यह बन गई है कि निगम के भाजपा पार्षद ही किराये बढ़ोतरी को लेकर अब विरोध करने को मजबूर हैं। प्रदर्शन में माकपा ने नगर निगम द्वारा शिमला शहर में अतार्किक रूप से दुकानों और गोदामों के किराए में की गई वृद्धि के विरोध में व्यापारियों के आंदोलन का समर्थन करने की बात कही। माकपा के सदस्य बाबू राम ने कहा कि बीजेपी शासित नगर निगम और सरकार जन विरोधी नीतियों को लागू कर जनता पर आर्थिक बोझ डाल रही है। शहर की जनता पर पेयजल, बिजली पर सेस, कूड़ा एकत्रीकरण की दरों में बढ़ोतरी की जा रही है। प्रदर्शन में माकपा के राज्य सचिव ओंकार शाद, राज्य सचिव मंडल सदस्य प्रेम गौतम, शिमला शहरी कमेटी के सचिव बलबीर पराशर, विजेंद्र मेहरा, बाबू राम, किशोरी ढडवालिया, विनोद विरसांटा, दिनेश मेहता, जीवन ठाकुर, पवन शर्मा, रमन और रुचिका मौजूद रहीं।
निगम में माकपा पार्षद ने किया था समर्थन
माकपा अब भले ही इस प्रस्ताव का विरोध कर रही हो लेकिन निगम में माकपा पार्षद शैली शर्मा ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था। हालांकि, पार्षद सदन में मौजूद नहीं थीं लेकिन इससे पहले हुई बैठकों में पार्षद किराया बढ़ोतरी के फैसले को सही ठहरा रही थीं। अब इस मुद्दे पर सियासत शुरू हुई तो माकपा और कांग्रेस इसका विरोध कर रहे हैं।