राजधानी में पानी दस फीसदी महंगा, अप्रैल से होगी वसूली
नगर निगम के विशेष हाउस में पानी की नई दरों के प्रस्ताव को मंजूरी, मुफ्त पानी पर सहमति न बनने से प्रस्ताव रद्द
छोटे परिवारों को नई दरों से मिल सकती है राहत
पानी की खपत के आधार पर ही रहेगा नया बिल
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहरवासियों को रोज पेयजल सप्लाई देने में नाकाम नगर निगम ने राजधानी में पानी महंगा कर दिया है। जनता को अब भले की मीटर रीडिंग पर बिल मिलेगा लेकिन इसकी दरें पहले से दस फीसदी ज्यादा होंगी। पानी की नई दरों के प्रस्ताव को नगर निगम के मंगलवार आयोजित विशेष हाउस में मंजूरी दी गई। हाउस की अध्यक्षता नगर निगम की महापौर कुसुम सदरेट ने की।
एक अप्रैल से पानी का बिल 14.50 रुपये प्रति किलोलीटर की दर से वसूल किया जाएगा। पहले यह दर 13.20 रुपये प्रति किलोलीटर थी। हालांकि, निगम प्रशासन ने जो प्रस्ताव तैयार किया था, उसमें यह दर 16.50 रुपये प्रति किलोलीटर रखी थी। लेकिन पार्षदों के विरोध के बाद इसे दो रुपये घटा दिया गया। 20 किलोलीटर यानि 20 हजार लीटर पानी के इस्तेमाल पर नगर निगम इसी दर से पानी बिल वसूलेगा। लेकिन इससे ज्यादा के इस्तेमाल पर 25 रुपये प्रति किलोलीटर के अनुसार बिल वसूली की जाएगी। नगर निगम की इन नई दरों से कम पानी इस्तेमाल करने वाले छोटे परिवारों को तो हल्का फायदा होगा। लेकिन बड़े परिवारों, किराएदार रखने वाले भवन मालिकों को ज्यादा इस्तेमाल पर बिल भी ज्यादा महंगा मिलेगा।
यहां समझिए कितना बिल आएगा
नगर निगम अभी तक शहरवासियों से फ्लैट बिल 13.20 रुपये प्रति किलोलीटर के अनुसार 390 रुपये मासिक वसूल रहा था। अब बिल मीटर रीडिंग के हिसाब से जारी होंगे। बिल दर 14.50 रुपये होगी। यानि 20 हजार लीटर तक पानी इस्तेमाल करने वाले का बिल 290 रुपये बनेगा। सीवरेज सेस मिलाकर उसे बिल 390 रुपये आएगा। 10 हजार लीटर पर यह बिल 245 रुपये होगा। 30 किलोलीटर तक के उपभोक्ता को बिल 702 रुपये मिलेगा। इन्हें अभी तक 394 रुपये ही बिल जारी होता था।
मुफ्त पानी देने पर नहीं बनी
सहमति, डिप्टी मेयर अड़े
शहरवासियों को तीन हजार लीटर मुफ्त पानी देने के स्लैब पर पार्षद एकजुट नहीं दिखे। पार्षदों ने पहले तो सभी को तीन हजार लीटर पानी मुफ्त देने की मांग की। लेकिन अधीक्षण अभियंता धर्मेंद्र गिल ने कहा अभी प्रति किलोलीटर पर 102 रुपये खर्च करने के बाद निगम जनता को 14.50 रुपये प्रति किलोलीटर के अनुसार बिल ले रहा है। यानि निगम पहले ही सब्सिडी दे रहा है। ऐसे में सबको मुफ्त पानी नहीं दे सकते। सिर्फ उन्हीं को मुफ्त पानी देंगे जो तीन हजार लीटर या इससे कम पानी इस्तेमाल करेंगे।
पार्षदों ने कहा कि इससे किसी को फायदा नहीं होगा, इसे रद्द कर दो। निगम प्रशासन ने इसे रद्द कर दिया। वहीं डिप्टी मेयर राकेश शर्मा अड़ गए। इनका कहना था कि जब सभी को मुफ्त पानी दे नहीं सकते तो स्लैब बनाया ही क्यों? कहा कि तीन हजार लीटर मुफ्त पानी देने से जनता को राहत मिलेगी और इसे लागू करना चाहिए। पूरे सदन में सिर्फ डिप्टी मेयर ही ऐसे थे जिन्हाेंने मुफ्त पानी का स्लैब रद्द करने के फैसले का विरोध किया।
विशेष सदन में महापौर
और आरती में नोंकझोंक
शिमला। पेयजल व्यवस्था कंपनी के हाथों में देने को लेकर महापौर कुसुम सदरेट की अध्यक्षता में हुए विशेष सदन में अधीक्षण अभियंता ने प्रेजेंटेशन दी। कहा कि कंपनी नगर निगम हर तीन माह में अपनी रिपोर्ट देगी। जनता की समस्याएं सुनने के लिए कस्टमर केयर की सुविधा मिलेगी। इसी दौरान पार्षद आरती चौहान ने मेयर से कंपनी की कार्यप्रणाली के बारे में पूछा। मेयर ने कहा कि अधिकारी सब बता चुके हैं।
पार्षद ने कहा कि आप बीओडी में निगम की प्रतिनिधि हैं, आपको कंपनी का पता होना चाहिए। सदन में चुप रहने के बजाय मेयर को खुद भी होमवर्क करके आना चाहिए। बाकी पार्षद भी आरती के समर्थन में बोलने लगे। बाद में आयुक्त ने सबको शांत किया। बैठक में पानी बिल का घाटा भरने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजने, कंपनी से तीन माह में रिपोर्ट लेने के प्रस्ताव पारित हुए। पार्षद किरण बावा ने पेयजल संकट के दौरान लोगों पर हुए मुकदमों को वापस लेने की मांग की।