शिमला। राजधानी में लोकल रूटों पर चलने वाली एचआरटीसी और प्राइवेट बसें चुनाव ड्यूटी पर रहीं और जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। करीब 25 निजी बसें रैलियों में भीड़ जुटाने के लिए शहर से बाहर थीं। हैरत की बात यह है कि बिना परिवहन विभाग की अनुमति के बसें शहर से बाहर ले जाई गईं। उधर, एचआरटीसी की 41 बसें इलेक्शन ड्यूटी पर कर्मचारियों को लेकर शहर से बाहर गई हुई थीं। लोकल रूटों पर बस सेवा न मिलने के कारण शहर के लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सामान्य के मुकाबले आधी बसें चलने के कारण परिवहन व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर गई। एचआरटीसी और निजी बसें निर्धारित रूटों पर नहीं चलीं। मंगलवार को प्रचार के आखिरी दिन आसपास के इलाकों विशेषकर ऊपरी शिमला में रैलियां निकाली गईं। रैलियों में भीड़ जुटाने के लिए शिमला से निजी बसें बुकिंग पर थीं। ओल्ड बस स्टैंड सहित, लिफ्ट, बैम्लोई, हिमलैंड, टालैंड, खलीणी, विकासनगर, छोटा शिमला, संजौली, आईजीएमसी, ऑकलैंड टनल, लक्कड़ बाजार और ताराहाल बस स्टॉपेज पर सुबह से लोगों की भीड़ जुटी रही। रूटों पर बसें न होने के कारण स्कूली छात्रों को भी भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
परमिशन नहीं ली, चालान होंगे : देष्टा
रैलियों में जाने को लेकर एक भी बस आपरेटर ने परमिशन नहीं ली थी। बिना परमिशन निर्धारित रूट से बाहर जाने वालों के चालान किए जाएंगे। दोबारा नियम तोड़ा तो रूट परमिट भी कैंसल होंगे।
- प्रशांत देष्टा
क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, शिमला
चुनाव आयोग के आदेशों पर भेजी थीं 41 बसें : नेगी
चुनाव आयोग के आदेशों पर 41 बसें इलेक्शन ड्यूटी पर भेजी गई थीं। शाम तक बसें वापस शिमला भी पहुंच गई थीं। बुधवार से सभी बसें निर्धारित रूटों पर चलेंगी।
- देवासेन नेगी
क्षेत्रीय प्रबंधक, एचआरटीसी