अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। दस फीसदी सैलरी बढ़ाने के बावजूद सैहब सोसाइटी के सैंकड़ों कर्मचारी हड़ताल पर अड़ गए हैं। नगर निगम की मासिक बैठक में सशर्त इन कर्मचारियों की सैलरी दस फीसदी बढ़ाने को मंजूरी दे दी। लेकिन साथ ही यह भी तय हुआ कि यदि ये कर्मचारी हड़ताल पर जाते हैं तो वेतन वृद्घि वापस ली जाएगी। वहीं, सदन के इस फैसले के बाद सैहब सोसाइटी कर्मचारियों का आक्रोश और बढ़ गया है। ये पहली सितंबर से हड़ताल पर जाने की तैयारी कर रहे हैं। बुधवार को ये कर्मचारी आखिरी बार मेयर से भी इस मामले पर बात करेंगे। यूनियन प्रधान जसवंत सिंह का कहना है कि दस फीसदी वृद्घि काफी नहीं है और पहली सितंबर से शहर में काम ठप किया जाएगा। इससे पहले निगम हाउस में सैहब कर्मियों के वेतन पर लंबी चर्चा हुई। पार्षद बिट्टू कुमार ने सफाई कर्मियों का वेतन बढ़ाने की मांग रखी। मीरा शर्मा, किमी सूद, शैली शर्मा समेत कई पार्षदों ने भी समर्थन दिया। लेकिन संजय परमार, दिवाकर देव शर्मा समेत बाकी पार्षदों ने सवाल किया कि इसकी क्या गारंटी है कि सैलरी बढ़ाने के बाद भी ये कर्मी हड़ताल नहीं करेंगे। विवेक शर्मा ने पूछा कि निगम ने आखिर हड़ताल जैसी स्थिति से निपटने के लिए क्या इंतजाम किए हैं। लंबी बहस के बाद तय किया गया कि सशर्त इन कर्मियों का वेतन दस फीसदी बढ़ाया जाएगा।
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पार्षद बोले, बढ़ाया जाए रेट, विधायक अड़े
सफाई कर्मियों की सैलरी बढ़ाने के प्रस्ताव पर ज्यादातर पार्षद सहमत दिखे। प्रशासन ने बताया कि दस फीसदी वेतन बढ़ोतरी से हर महीने सात लाख रुपये खर्चा बढ़ेगा। पार्षद कहने लगे कि एमसी फंड से बोझ कम करने के लिए डोर टू डोर गारबेज कलेक्शन की फीस 50 से बढ़ाकर 70 रुपये की जाए। स्थानीय विधायक सुरेश भारद्वाज इस पर सहमत नहीं हुए। कहा कि शहरवासियों पर बोझ नहीं डाला जाना चाहिए। विधायक की बात पर कुछ पार्षद सहमत हुए और फीस न बढ़ाने की बात कही।
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आवारा कुत्तों पर तीखी बहस
शिमला। छोटा शिमला में आवारा कुत्ते के काटने से घायल हुए एक व्यक्ति के मामले पर पार्षद विदुषी ने निगम प्रशासन को आड़े हाथों लिया। पूछा कि फोन करने के बावजूद दो घंटे देरी से निगम की गाड़ी कुत्ते को पकड़ने पहुंची। मेयर ने संबंधित अधिकारियों को लताड़ते हुए भविष्य में इस तरह की लापरवाही से बचने के निर्देश दिए।