जिला सिरमौर की नेईनेटी पंचायत के भूण के पास सड़क पर गड्ढे से बचने के चक्कर में निजी बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। मानवा से सोलन जा रही बस भगनाल (एचपी-64-9097) के चालक ने गड्ढे से बचने के लिए कट लगाया जिससे एक्सल टूट गया और अगले दोनों टायर बाहर निकल गए।
बस कई पलटे खाकर नीचे लुढ़क गई। हादसे में छह यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि दो ने अस्पताल ले जाते वक्त दम तोड़ दिया। 11 यात्री घायल हैं, जिनमें से कई की हालत नाजुक बताई जा रही है।
उन्हें सोलन जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बस में कुल 25 लोग सवार थे, जिनमें से छह को कोई चोटें नहीं आई हैं। हादसे से जख्मी यात्रियों की चीख-पुकार सुनकर स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और अपने स्तर पर बचाव कार्य शुरू कर दिया। स्थानीय प्रशासन, पुलिस और एंबुलेंस भी मौके पर पहुंच गए।
एसडीएम राजगढ़ नरेश कुमार वर्मा ने बताया कि मृतकों के परिजनों को 15-15 हजार, गंभीर घायलों को 10-10 हजार, अन्य घायलों को 5-5 हजार की फौरी राहत दी गई है। शवों के पोस्टमार्टम मौके पर ही करवाने के लिए चिकित्सकों का दल भी बुला लिया गया था।
मृतकों की सूची- बस हादसे में ढोडूराम (58) पुत्र बुद्धिराम निवासी डाहर (हरिपुरधार), सुभाष चंद्र (57) पुत्र किशोर लाल गांव लपियाना तहसील हारचक्कियां (कांगड़ा), प्रिया (31) पत्नी किशनलाल शाया-सनौरा, कौशल्या देवी निवासी थानाधार, उदयराम पुत्र रामलाल शाड़-पजयोगा, बस चालक संतोष कुमार निवासी वाकनाघाट (सोलन) की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे की शिकार हुई नारदा देवी (55) पत्नी मोहिंद्र निवासी कश्मली (द्राबला) और साढ़े तीन वर्षीय आस्तिक पुत्र प्रदीप थानाधार की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई।
ये हुए घायल- सड़क हादसे में उपमंडल राजगढ़ निवासी देशराज (ठंडीधार), कविता (शाड़ पंजेवगा), विजेंद्र (नेईनेटी), विनोद (नेईनेटी), राजेंद्र हाब्बी (रिटब), कर्मचंद (पैण कुफ्फर), सुरजीत (पजेरली), वीरेंद्र (धामला), बलवीर (भराड़ी) नौहराधार, पप्पू बदायूं (उत्तरप्रदेश) और धर्मवीर साबल (उत्तरप्रदेश) घायल हुए हैं।
ठियोग (रामपुर बुशहर)। ठियोग से करीब 11 किलोमीटर दूर खोलगली में जेन एस्टिलो (एचपी 63बी0227) कार हादसे में एक ही परिवार के छह लोगों की जान चली गई। इस हादसे में सुन्नी के टेक राम ने तीन बेटे, दो बहुएं और एक पोता खो दिया है। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया है।
पुलिस के अनुसार ये लोग जड़ोग साहली से क्यार की ओर जा रहे थे। अचानक कार अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। मरने वालों में लक्ष्मी सिंह (60) पुत्र टेकराम गांव बघार डाकखाना थाची तहसील सुन्नी, कमल चंद (54) गांव जड़ोग डाकखाना चलाहल तहसील सुन्नी, मीरा देवी (47) पत्नी कमल चंद, हेतराम (54) गांव जड़ोग
डाकखाना चलाहल तहसील सुन्नी, तृप्ता देवी (50) पत्नी हेतराम, जय किशन (22) पुत्र कमल चंद शामिल हैं। डीएसपी राम लाल बंसल ने बताया कि पुलिस हादसे के कारणों का पता लगा रही है।
आस्तिक के शव को ले जाते हुए।
सिरमौर जिले के नेईनेटी में हुए बस हादसे में दादी और पोता काल का ग्रास बन गए। राजगढ़ क्षेत्र की भुईरा पंचायत के थानाधार गांव की कौशल्या अपने चार साल के पोते आस्तिक के साथ रिश्तेदारों के घर गई थी। उनको यह अंदाजा नहीं था कि रविवार को दादी-पोता वापस घर नहीं पहुंचेंगे।
रविवार को नेईनेटी के पास हुए निजी बस हादसे में कौशल्या ने मौके पर दम तोड़ दिया, जबकि सोलन लाए जा रहे चार वर्षीय आस्तिक की अस्पताल पहुंचने से पहले मौत हो गई। बताया जा रहा है कि दादी और पोता कुछ दिन पहले रिश्तेदार के घर गए थे।
रविवार को निजी बस से घर थानाधार लौट रहे थे। दादी और पोते की मौत के बाद गांव का माहौल गमगीन हो गया। सोलन अस्पताल में चार साल के आस्तिक का शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों का सौंप दिया गया है।
नूरपुर में हुए स्कूल दर्दनाक बस हादसे के बाद भी जयराम सरकार ने सबक नहीं लिया। स्कूल बस गिरने के बाद सरकार ने हादसों पर अंकुश लगाने को बड़े-बड़े दावे किए। आपात बैठक बुलाकर सड़क की हालत सुधारने को गंभीरता के दावे किए। नई परिवहन नीति भी लागू की, लेकिन रविवार को हिमाचल में हुए दो बड़े हादसों ने सरकार के वायदों की पोल खोलकर रख दी।
सिरमौर जिले के नेईनेटी भूण बस हादसा और ठियोग के समीप खोलगली में हुए दर्दनाक कार हादसे ने फिर हिमाचल को झकझोर कर रख दिया है। बताया जा रहा है कि जहां बस हादसा हुआ है, वहां सड़क की हालत ठीक नहीं थी और सड़क किनारे क्रैश बैरियर भी नहीं लगे थे।
हिमाचल में सड़कों की हालत दयनीय है। सात सौ के करीब ऐसे ब्लैक स्पॉट हैं, जहां हादसा होने की आशंका बनी रहती है। सरकार की ओर से इन स्पॉट को दुरुस्त नहीं किया जा रहा है।
खोलगली में जहां कार हादसा हुआ है, वहां पहले भी इस तरह की घटनाएं होती रही हैं। सरकार सभी सड़कों के किनारे क्रैश बैरियर लगाने को हाथ खड़े कर चुकी है। क्रैश बैरियर की शीट महंगे होने के कारण इन्हें हिमाचल की सारी सड़कों पर प्रयोग में नहीं लाया जा रहा है।
लिहाजा, सरकार पुरानी तकनीक के पैरापिट लगाने को ही मजबूर है। इधर, परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर ने बस और वाहन हादसे में जांच के आदेश दिए हैं। परिवहन विभाग के अफसरों को मौके पर जाने के निर्देश दिए हैं। सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी है।
- 9 अप्रैल, 2018 को नूरपुर दर्दनाक हादसा, 23 बच्चों समेत 27 की मौत
- 20 अप्रैल, 2017, यात्रियों से भरी उत्तराखंड की ओवरलोड निजी बस शिमला के गुम्मा के निकट खाई में गिरी 45 की मौत
- 5 नवंबर, 2016 को मंडी के बिंद्रावणी में ब्यास में गिरी बस, 17 की मौत, 26 घायल
- 20 मई, 2016 तो चंबा में बस हादसा, 14 मरे, 31 घायल
- 23 जुलाई, 2015 कुल्लू में पार्वती नदी में गिरी बस, 31 लोग बहे
- 21 अगस्त, 2014 किनौर के रुतरंग में बास्पा नदी में बस गिरी, 23 की मौत, 20 घायल
- 27 सितंबर, 2013 रेणुका में ददाहू टिक्कर संपर्क मार्ग पर निजी बस खाई में गिरी, बस में सवार सभी 21 लोगों की मौत
- 8 मई, 2013 मंडी के झीड़ी में जोगणी माता मंदिर के पास ब्यास नदी में समाई बस, 40 मरे
- 11 अगस्त, 2012 को चंबा धुलाड़ा मार्ग पर गागला के पास बस हादसा, 52 मरे
राज्यपाल आचार्य देवव्रत और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने रविवार को सिरमौर जिले के राजगढ़ के पास नेईनेटी और शिमला के ठियोग छैला मार्ग पर हुए सड़क हादसों में लोगों की मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त किया है। राज्यपाल ने मृतकों के परिजनों के साथ अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की है।
मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिवारों के साथ अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं और घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की है। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि मृतकों के परिवारों को हर संभव सहायता दी जाए और घायलों को उचित उपचार सुविधा प्रदान की जाए।
हितेश शर्मा/वेद प्रकाश ठाकुर, राजगढ़ (सिरमौर)। भीषण बस हादसे से नेईनेटी पंचायत दहल उठी है। यह हादसा कई लोगों को जिंदगी भर का जख्म दे गया। चीखपुकार ने नेईनेटी को हिलाकर रख दिया। स्थानीय लोगों को भूण गांव के समीप बस गिरने की सूचना मिली तो वे अपना कामकाज छोड़कर घटनास्थल की ओर भागे और राहत एवं बचाव कार्य में जुट गए।
सैकड़ों लोग घायलों को खाई से निकालने लगे। थोड़ी और देर हो जाती तो मृतकों की संख्या बढ़ सकती थी। ग्रामीणों ने बस से इधर-उधर छिटके और छत के नीचे दबे घायलों को बाहर निकालकर सड़क तक पहुंचाया।
ग्रामीणों के अनुसार करीब 8:45 बजे हादसे की सूचना मिली। घायलों को तुरंत अस्पताल लाया गया। बस के नीचे दबे शवों को भी निकाला गया। महिलाएं भी पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर राहत एवं बचाव कार्य में जुटी थीं।
शिक्षक को कांगड़ा से बुलाकर लाई मौत- मौत जहां लिखी होती है, व्यक्ति को वहीं खींच ले आती है। नेईनेटी के समीप हुए बस हादसे में मारे गए कांगड़ा जिले के हारचक्कियां निवासी मृतक सुभाष चंद मानवा में शास्त्री पद पर सेवाएं दे चुके थे। उनका स्थानांतरण बीते वर्ष ही अपने गृह जिले के लिए हुआ था।
वे अपनी सर्विस बुक के किसी कार्य को लेकर यहां आए थे। रविवार को वापसी के दौरान हादसे में उनकी मौत हो गई। हादसे में घायल रिटब निवासी राजेंद्र हाब्बी ने बताया कि वह और मृतक सुभाष चंद एक ही सीट पर बैठे थे। इस दौरान उन्होंने अपने ट्रांसफर संबंधी जानकारी दी थी।
नेरीपुल-सोलन वाया सनौरा सड़क खूनी सड़क बन गई है। एक के बाद एक हो रहे सड़क हादसों से ग्रामीणों में भी भारी आक्रोश है। इस सड़क मार्ग पर प्रतिवर्ष एक दर्जन से अधिक दुर्घटनाएं हो रही हैं, लेकिन, संबंधित विभाग सड़क की दशा सुधारने की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
एक बार फिर बस हादसे ने पुराने जख्मों को हरा कर दिया है। सैकड़ों वाहन रोजाना इस मार्ग से गुजरते हैं। जिस स्थान पर बस गिरी, यदि यहां पर क्रैश बैरियर या पेराफिट होता तो हादसा टल सकता था। चालक ने गड्ढा बचाने के चक्कर में बस से नियंत्रण खो दिया और बस ढांक में गिर गई।
यह सड़क सिंगल लेन पक्की हुई है, लेकिन इसकी भी हालत ठीक नहीं है। लोक निर्माण विभाग ने हाल में कुछ सड़क पक्की की है। सड़क पर वाहनों के भारी दबाव के कारण सड़क पर फिर से गड्ढे पड़ गए हैं। सड़क पर कई जगह गड्ढों की भरमार है। खस्ताहाल सड़क के कारण अभी तक दर्जनों लोग अपनी जिंदगी गंवा चुके हैं।
सड़क सुधारने को धरना दे चुके हैं ग्रामीण
ग्रामीणों ने इस सड़क की हालत को सुधारने के लिए न केवल धरना प्रदर्शन किया था, बल्कि इसके लिए एक जनहित याचिका भी उच्च न्यायालय में डाली थी। इसके बाद ही यह सड़क सिंगल लेन पक्की की गई। इस सड़क की कटिंग डबल लेन के लिए करीब डेढ़ दशक पहले हुई थी।
ग्रामीणों का कहना है कि इस सड़क पर वाहनों की भारी संख्या को देखते हुए यह सड़क डबल लेन पक्की होनी चाहिए और सड़क के किनारों में पैरापिट और क्रैश बैरियर लगाए जाने चाहिए।
दावों तक ही सिमटा क्रैश बैरियर लगाने का काम- ठियोग-हाटकोटी सड़क पर हुए हादसे में छह और लोगों को जान चली गई। घटनास्थल पर फिर क्रैश बैरियर न होने की बात सामने आई है। कहा जा रहा है कि क्रैश बैरियर होते तो शायद इन लोगों की जान बच जाती। अब सवाल यह उठता है कि कोई भी हादसा होने के बाद क्रैश बैरियर लगाने के बड़े-बड़े दावे तो किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं होता है।
ठियोग-हाटकोटी सड़क पर सबसे ज्यादा हादसे होते हैं, लेकिन सरकार और प्रशासन इसको लेकर गंभीर नहीं हैं। हालांकि, पिछले दिनों स्थानीय विधायक राकेश सिंघा ने सभी विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की थी। इसमें सड़क किनारे क्रैश बैरियर लगाने का मुद्दा गंभीरता से उठाया था। विभागीय अधिकारियों ने 15 दिन में सड़क की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही थी, लेकिन दो माह बाद भी क्रैश बैरियर नहीं लग पाए हैं।
सिंघा ने बताया कि प्रदेश में सड़कों की हालत खस्ता है। क्रैश बैरियर नहीं हैं। इससे हादसों में लोगों को जान गंवानी पड़ रही है। उधर, एसडीएम ठियोग एमडी शर्मा ने बताया कि हादसे का शिकार हुए सभी लोगों के परिजनों को प्रशासन और सरकार की ओर से चार-चार लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने जल्द ब्लॉक स्पॉट को सुधारने और क्रैश बैरियर लगाने के निर्देश दिए।