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शिमला से शिफ्ट हो रहा कारोबार, पलायन कर रहे कारोबारी

Fri, 29 Mar 2019 11:40 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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लोकसभा चुनाव और अगली सरकार से शिमला के कारोबारियों की क्या उम्मीदें हैं, इसे जानने के लिए अमर उजाला कार्यालय में शुक्रवार को शहर के प्रबुद्घ कारोबारियों से संवाद किया गया। इस दौरान जीएसटी, किराया, पार्किंग और कारोबारियों की सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कई ज्वलंत मुद्दे सामने आए। कारोबारी बोले कि पिछले तीन दशक से शिमला में कारोबार घटा है। सरकार चाहे भाजपा की रही हो या कांग्रेस की, किसी ने कारोबारियों के लिए कुछ नहीं किया। लोकसभा में भी हमारा सांसद सिर्फ एक नग पूरा करता है। आज तक किसी ने संसद में कारोबारियों का मुद्दा नहीं उठाया। जरूरत ऐसी हो गई है कि कारोबारियों को खुद अपना नेता चुनना पड़ेगा, जो हमारी मांगें उठा सकें। कारोबारी बोले कि शहर में एक हजार दुकानदार नगर निगम की दुकानें चला रहे हैं। इनसे करीब 15 हजार वोटर जुड़े हैं, लेकिन कोई हमारे साथ किराया बढ़ोतरी का विरोध नहीं कर रहा। सड़कें खस्ताहाल हैं और पर्यटन का विकास भी नहीं हो रहा है। उच्च शिक्षा और रोजगार के लिए युवा पीढ़ी दूसरे राज्यों के लिए पलायन कर रही है। कारोबारी बोले कि अगली सरकार जिसकी भी हो, कारोबारियों की मांगें सुनी जानी चाहिए। कारोबार बढ़ाने के लिए पर्यटन विकास भी जरूरी है। बोले, देश प्रेम तो ठीक है, लेकिन रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा और रोजगार पर भी ध्यान देना होगा।

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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहर के कारोबारियों का कहना है कि शिमला के बाजारों में अब फुटफॉल घट गया है। कारोबार अब परवाणू शिफ्ट हो रहा है। यहां एक तो लेबर चार्ज इतना ज्यादा है कि हर सामान की लागत बढ़ जाती है और दूसरा यहां पार्किंग भी नहीं। बाजार आने वाले व्यक्ति को पहले गाड़ी पार्क करने के लिए सौ रुपये पार्किंग में देने पड़ते हैं। ऐसे में ज्यादातर ग्राहक अब गाड़ी लेकर सीधे परवाणू पहुंच रहे हैं। सस्ता सामान एक जगह मिल रहा है। दूसरा पार्किंग की भी कोई दिक्कत नहीं। पर्यटन सीजन में जब कारोबारियों के कमाने के दिन आते हैं तो रिज और मालरोड पर बाहरी राज्यों के स्टॉल सज जाते हैं। इनका जीएसटी नंबर कोई पूछता नहीं। शहर के कारोबारी फिर घाटे में रह जाते हैं। कारोबारियों को ऑनलाइन शॉपिंग से भी मुकाबला करना पड़ रहा है। छह आनलाइन कंपनियां लाखों कारोबारियों को बेरोजगार कर रही हैं। शहर में भी कई कारोबारी या तो काम छोड़ चुके हैं या फिर काम ही बदल दिया है। सरकार ऐसी नीति बनाए जिससे ऑनलाइन कंपनियों पर लगाम लगे। बाजार और आनलाइन दोनों की कीमतें बराबर हों। कारोबारियों ने 24 घंटे दुकानें खोलने की भी मांग रखी।


ये हैं कारोबारियों के मुख्य मुद्दे
-जीएसटी सबसे बड़ी उलझन है। ज्यादातर कारोबारी सीए पर निर्भर हो गए हैं।
-कारोबारियों को सामाजिक सुरक्षा के लिए बीमा जैसी भी कोई योजना नहीं।
-सब्जी-अनाज मंडी समेत मुख्य बाजारों में पार्किंग नहीं, कोई लोडिंग-अनलोडिंग प्वाइंट भी नहीं।
-रिज माल पर बाहरी राज्यों के स्टॉल लगने से हो रहा घाटा।
-उच्च शिक्षा, रोजगार के लिए युवाओं का दूसरे राज्यों की ओर पलायन।
-इंस्पेक्टर राज, शहर में दुकानों के किराए में अत्यधिक बढ़ोतरी।
-ऑनलाइन शॉपिंग से मुकाबला, पर्यटन विकास न होना।

हर बात पर आखिर बाजार ही बंद क्यों ?
राजनीतिक दल हो या फिर कोई यूनियन, विरोध जताने के लिए हर कोई बात-बात पर बाजार बंद करवा देता है। कारोबारी बोले कभी कोई क्लीनिक, दफ्तर क्यों बंद नहीं होते। एक तो ये चंदा लेकर भी हमारे लिए कुछ करते नहीं, दूसरा जबरदस्ती हमसे बाजार भी बंद करवा देते हैं।
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चुनावी शोर में दब गए कारोबारियों के मुद्दे
कारोबारी बोले कि चुनाव के वक्त अब सर्जिकल स्ट्राइक समेत कई मुद्दों का इतना ज्यादा प्रचार हो रहा है कि कई अहम मुद्दे दबकर रह गए हैं। इस मुद्दे को अब हौव्वा बना दिया गया है। कांग्रेस के गरीब लोगों को 72 हजार देने के वायदे पर कारोबारी बोले कि इससे गरीबी तो हटेगी लेकिन कई लोग काम करना ही छोड़ देंगे।

डिफाल्टर बन गए अधिकांश कारोबारी
संवाद कार्यक्रम में कारोबारियों का ज्यादा दर्द जीएसटी को लेकर छलका। कहा कि जीएसटी का सरलीकरण आवश्यक है। सरकार खुद जीएसटी पर कंफ्यूज है। इसी कारण अधिकांश कारोबारी डिफाल्टर हो चुके हैं। जीएसटी में सजा का भी प्रावधान रखा गया है। आने वाली सरकार से मांग है कि जीएसटी का सरलीकरण करे और सजा का प्रावधान खत्म किया जाए।

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