अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। कुत्ते और बंदर के काटने पर अब पांच नहीं तीन टीके लगाए जाएंगे। डब्ल्यूएचओ की नई गाइडलाइन के हाद अस्पतालों में यह दिशा-निर्देश जारी हुए हैं। स्टेट मास्टर ट्रेनर डॉ. ओमेश कुमार भारती ने इसकी पुष्टि की है। अस्पतालों में हर रोज पंद्रह से बीस मामले इस तरह के आते हैं। मरीजों को इस दौरान टीके लगवाए जाते हैं। इसके बाद पर्ची पर लिखकर उन्हें तय तिथियों में बाकी के एंटी रेबिज वैक्सीन (एआरवी) लगवाने के लिए बुलाया जाता है। अब पांच नहीं तीन ही इंजेक्शन लगेंगे।
कुत्ते और बंदर के काटने के बाद जब मरीज अस्पताल आता है तो पहला टीका लगाया जाता है। इसके बाद 3,7,14 और 28 दिन के बाद मरीज को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में टीका लगवाने के लिए आना होता है। अब इंजेक्शन कम लगेगा।
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एक एमएल लगेगी सीरम की डोज
शिमला। कुत्तों और बंदरों के काटने के बाद मरीजों को सीरम की डोज लगाई जाती है। इसे पहले वजन के हिसाब से लगाया जाता था। अब मरीजों को एक एमएल डोज दी जाएगी। डीडीयू के डॉ. ओमेश कुमार भारती ने इस बारे में शोध किया है। मौजूदा समय में लोगों को भी यह डोज अस्पताल में मुफ्त में उपलब्ध करवाई जा रही है। इसके बाद ही मरीजों को एआरवी टीका लगाया जाता है।