मुख्यमंत्री कार्यालय ने आईजीएमसी में नाटे व्यक्ति के वीआईपी ट्रीटमेंट लेने को लेकर प्रबंधन से जवाब मांगा है। साथ ही उसकी पहचान करने के भी निर्देश दिए हैं। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय में इसे गंभीरता से लिया गया। आईजीएमसी प्रबंधन अब नाटे व्यक्ति की पहचान सीसीटीवी से भी करने की बात कर रहा है।
प्रशासनिक अधिकारियों के कमरे में इस तरह से बर्ताव करने वाले व्यक्ति की पहचान को लेकर डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और हर व्यक्ति के कमरों में चर्चा रही। लेकिन किसी को भी यह मालूम नहीं हो पाया है कि आखिर वह था कौन? जबकि दूसरी ओर अस्पताल में सुबह से ही नाटे कद के व्यक्ति की पहचान बताने को लेकर सीएम ऑफिस से बार-बार फोन आते रहे। सीएम ऑफिस से यह भी पूछा जा रहा था कि वह उस व्यक्ति का नाम और पहचान बताए जो सीएम ऑफिस के नाम को बदनाम करने पर तुला है।
हालांकि अधिकारी कहते रहे कि उस व्यक्ति को वह ट्रेस नहीं कर पाए हैं। लेकिन दूसरी ओर से दो टूक जवाब मिला कि हमें उस व्यक्ति की पहचान चाहिए। ऐसे में सभी प्रशासनिक अधिकारी यहां वहां फोन करके नाटे कद के व्यक्ति के बारे में टोह लेते नजर आए। अस्पताल में दोपहर दो बजे तक भी सीएम ऑफिस से प्रशासनिक अधिकारियों के फोन पर घंटी बजाकर उन्हें बार-बार आगाह किया।
इसके बाद कई अधिकारियों ने दिमाग के घोड़े दौड़ाकर उस प्रशासनिक अधिकारी की जानकारी लेनी चाही। किसी ने कहा कि हमारे यहां तो दूध वाली चाय बनाई जाती है तो कोई कहता रहा कि हमारे यहां तो नीबू वाली चाय बनती ही नहीं है। हालांकि एक अधिकारी ने शक के आधार पर यह जान लिया है कि किस अधिकारी के कमरे में नीबू वाली चाय बनती है।
लेकिन शक होने के अलावा वह कुछ कहने से गुरेज करते रहे। लेकिन दूसरी ओर स्थिति साफ उस प्रशासनिक अधिकारी को वह स्थिति साफ हो गई है। उन्होंने उसे पहचान भी लिया है। ऐसे में जब वह नाटा व्यक्ति अस्पताल आता है तो उसको इस बारे में जरूर प्रशासनिक अधिकारी द्वारा मामले पर फटकार तो लगाई ही जाएंगी।
आईजीएमसी में एक छोटे कद का व्यक्ति दो तीन बार आया। हर बार एक नया मरीज साथ लेकर आता था और एक प्रशासनिक अधिकारी के कमरे में घुसकर कहता था सीएम आफिस से आया हूं, एक मरीज का चेकअप करवाना है।
प्रशासनिक अधिकारी सीएम ऑफिस का नाम सुनकर उस व्यक्ति के साथ एक कर्मचारी भेजकर उपचार करवाने में मदद करवा देते थे। लेकिन जब यह व्यक्ति बार-बार आने लगा तो प्रशासनिक अधिकारी को शक हुआ कि वह व्यक्ति सच में सीएम आफिस में है भी या नहीं। लेकिन जब तक वह पता कर पाते नाटे कद का यह कहीं गायब हो गया।