प्रशासन की ओर से माघू राम, तारा देवी, लेदराम, चुन्नी लाल, कमला देवी और लगन चंद को 30-30 हजार रुपये की फौरी राहत के साथ-साथ दो महीने का राशन, कंबल, तिरपाल, टेंट व अन्य आवश्यक सामग्री प्रदान की गई है। जबकि आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों में रहने वाले पांच परिवारों को भी पांच-पांच हजार की फौरी राहत दी गई है। इनमें ऐले राम, रोशन लाल, रमेश चंद, शेर सिंह और गोपी चंद शामिल हैं।
कड़ाके की ठंड, अफरातफरी में गुजरी रात
महेंद्र सिंह पालसरा, न्यूली कुल्लू। सैंज घाटी के बरशांगड़ गांव में भयानक आग से कोहराम मचा रहा। देर रात तक आग की लपटों में लोग अपने आशियानों को जलते देखने को मजबूर रहे। बड़ी संख्या में आग बुझाने को जुटे लोगों ने आखिरकार आग को फैलने से तो रोक लिया लेकिन, ज्यादातर ग्रामीण अग्निकांड के चलते सो नहीं पाए।
प्रभावित कुनबों के सदस्याें को तो अफरातफरी के माहौल में तिरपाल में रात गुजारनी पड़ी। शांघड़ पंचायत के पूर्व प्रधान घुंघरमल ने कहा कि गांव में करीब दो दर्जन से अधिक परिवार रहते हैं और सभी के घर काष्ठकुणी शैली के बने हैं।
ऐसे में उन्होंने पॉवर स्प्रे पंप से ही आग पर काबू पाया है। कई मकानों की छतों को उखाड़ा गया। उन्होंने कहा कि आग लगने का कारण शॉट सर्किट बताया जा रहा है। मंदिर के साथ छह परिवारों के घर राख के ढेर में तबदील हो गए। लेकिन सर्दी का मौसम शुरू होने से छह परिवारों को तरपाल के नीचे ही सर्द रातें काटनी होंगी।