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मांगों को लेकर सचिवालय के बाहर गरजे 108 एंबुलेंस कर्मी

Fri, 10 Aug 2018 10:28 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी हड़ताल पर गए 108 एंबुलेंस कर्मी काम पर नहीं लौटे हैं। वीरवार को इन कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर सचिवालय के बाहर प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने कंपनी के  खिलाफ शोषण करने का आरोप लगाया। कर्मचारियों ने कहा कि कोर्ट अगर हड़ताल को गैर कानूनी मानता है तो वे सामूहिक इस्तीफा देने को तैयार हैं।

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108 कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष पूर्ण चंद ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि कंपनी के अधिकारी कर्मचारियों से 8 घंटे की बजाय 10 घंटे काम ले रहे हैं। 2 घंटे का ओवरटाइम कर्मचारियों को नहीं दिया जा रहा है। कर्मचारियों के ईपीएफ में घपलेबाजी की जा रही है।

वे चाहते हैं कि कोर्ट उनकी बात भी सुने। अभी कोर्ट से जारी आदेश उन्हें नहीं मिले हैं। जिस मामले में कोर्ट ने संज्ञान लिया है, वह उनके द्वारा ही याचिका दायर की है। उन्होंने कहा कि वे अपना पक्ष सभी दस्तावेजों के साथ कोर्ट में रखना चाहते हैं।
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उन्होंने कहा कि वह कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हैं, लेकिन चाहते हैं कि उनके साथ जो कुछ हो रहा है उसके बारे कोर्ट को भी पता हो। अध्यक्ष ने कहा कि मांगों को लेकर उनकी हड़ताल जारी रहेगी।

उल्लेखनीय है कि बुधवार को हाईकोर्ट ने 108 एंबुलेंस में काम करने वाले ड्राइवरों और टेक्नीशियनों की हड़ताल पर तुरंत रोक लगाई थी और हड़ताली कर्मचारियों को ड्यूटी ज्वाइन करने को कहा है। कोर्ट ने हड़ताली कर्मचारियों के खिलाफ  कार्रवाई करने को भी कहा था।

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स्थानीय नीति को लेकर सचिवालय के बाहर प्रशिक्षु कंडक्टरों का प्रदर्शन

पिछले 20 दिन से हड़ताल कर रहे प्रशिक्षु कंडक्टरों ने वीरवार को सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया। उन्होंने एचआरटीसी प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रशिक्षु कंडक्टरों का कहना है कि जब निगम प्रबंधन के पास कंडक्टरों की कमी थी तो उन्होंने दिन-रात एक कर निगम में सेवाएं दीं।

अब जब एचआरटीसी ने नए कंडक्टरों की भर्ती की तो प्रशिक्षु कंडक्टरों का रोजगार छीन लिया। संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने उनके लिए स्थायी नीति नहीं बनाई तो आमरण अनशन होगा। 

प्रदेशाध्यक्ष बलवंत तोमर ने कहा कि एचआरटीसी पिक एंड चूज की नीति अपना रहा है। पहले 13 प्रशिक्षुओं को नौकरी पर बुलाया गया, जून महीने में 32 और प्रशिक्षु कंडक्टरों को सेवाएं देने का पत्र जारी किया। जिनकी जान पहचान है, उन्हें नौकरी पर बुलाया जा रहा है, जिन्हें कोई नहीं जानता है उन्हें नौकरी से बाहर किया गया।

उन्होंने कहा कि निगम प्रबंधन ने 5 फीसदी अंक वाली पॉलिसी का झुनझुना थमाया है, जो प्रशिक्षु कंडक्टरों को स्वीकार नहीं है। प्रशिक्षु कंडक्टरों ने एक साल तक एचआरटीसी में सेवाएं दी हैं, सब लोग काम जानते हैं। ऐसे में कोई भी प्रशिक्षु कंडक्टर परीक्षा नहीं देगा। उन्होंने कहा कि अगर कैबिनेट में इनके लिए पॉलिसी का फैसला नहीं लिया तो कंडक्टर आमरण अनशन पर बैठेंगे।
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