पिछले 20 दिन से हड़ताल कर रहे प्रशिक्षु कंडक्टरों ने वीरवार को सचिवालय के बाहर प्रदर्शन किया। उन्होंने एचआरटीसी प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रशिक्षु कंडक्टरों का कहना है कि जब निगम प्रबंधन के पास कंडक्टरों की कमी थी तो उन्होंने दिन-रात एक कर निगम में सेवाएं दीं।
अब जब एचआरटीसी ने नए कंडक्टरों की भर्ती की तो प्रशिक्षु कंडक्टरों का रोजगार छीन लिया। संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने उनके लिए स्थायी नीति नहीं बनाई तो आमरण अनशन होगा।
प्रदेशाध्यक्ष बलवंत तोमर ने कहा कि एचआरटीसी पिक एंड चूज की नीति अपना रहा है। पहले 13 प्रशिक्षुओं को नौकरी पर बुलाया गया, जून महीने में 32 और प्रशिक्षु कंडक्टरों को सेवाएं देने का पत्र जारी किया। जिनकी जान पहचान है, उन्हें नौकरी पर बुलाया जा रहा है, जिन्हें कोई नहीं जानता है उन्हें नौकरी से बाहर किया गया।
उन्होंने कहा कि निगम प्रबंधन ने 5 फीसदी अंक वाली पॉलिसी का झुनझुना थमाया है, जो प्रशिक्षु कंडक्टरों को स्वीकार नहीं है। प्रशिक्षु कंडक्टरों ने एक साल तक एचआरटीसी में सेवाएं दी हैं, सब लोग काम जानते हैं। ऐसे में कोई भी प्रशिक्षु कंडक्टर परीक्षा नहीं देगा। उन्होंने कहा कि अगर कैबिनेट में इनके लिए पॉलिसी का फैसला नहीं लिया तो कंडक्टर आमरण अनशन पर बैठेंगे।