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डेढ़ साल में इतने मंदिरों में हुई चोरी

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हिमाचल प्रदेश के प्राचीन मंदिर सुरक्षित नहीं है। पिछले डेढ़ साल के भीतर प्रदेश के मंदिरों में 102 बार चोरियां की गईं। इसमें 1.12 करोड़ रुपये की प्रापर्टी का नुकसान हुआ है।
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इस अवधि में पुलिस महज 21 मंदिरों से ही चोरी करने वाले अपराधियों को पकड़ पाई है, जबकि अन्य में पुलिस के हाथ खाली रहे। 63 मामलों में तो पुलिस केवल अज्ञात चोरों के खिलाफ मुकदमे दर्ज करने तक सीमित रही है।

कुल्लू के विधायक महेश्वर सिंह की ओर से पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को विधानसभा में यह जवाब दिया।

मुख्यमंत्री ने सदन में दिया जवाब

मुख्यमंत्री ने बताया कि एक जनवरी 2013 से 15 जुलाई 2014 के बीच प्रदेश के प्राचीन मंदिरों में 102 चोरियां हुई हैं। इस दौरान 21 मामलों में 27 अपराधी पकड़े गए हैं। 18 केसों में अदालत में चालान पेश किया जा चुका है।

63 मामलों में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि मंदिरों की सुरक्षा पुख्ता करने के लिए बड़े-बड़े मंदिरों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं।

चेतावनी के लिए सायरन लगाने, मंदिर के प्रवेश द्वार पर ग्रिल लगाने और अजनबी व्यक्तियों पर निगाह रखने के लिए निर्देश दिए गए हैं। सरकार की ओर से दस हजार प्राचीन प्रतिमाओं, दुर्लभ चित्रकलाएं और कलाकृतियों का पंजीकरण किया जा चुका है।

एक साल में 3686 सड़क दुर्घटनाएं

हिमाचल प्रदेश में एक साल के भीतर 3686 गाड़ियां सड़क दुर्घटनाओं की शिकार हो चुकी हैं। इस दौरान 12.21 करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान की जा चुकी है। प्रति व्यक्ति अधिकतम 1.5 लाख रुपये मुआवजा राशि दी जाती है। धर्मपुर के विधायक महेंद्र सिंह की ओर से पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने यह जवाब दिया है।

प्रदेश में 53 पशु चिकित्सकों के पद खाली
हिमाचल प्रदेश में पशु चिकित्सा से संबंधित 3395 पशु चिकित्सा संस्थान है। 378 संस्थानों में 422 पशु चिकित्सकों के पद सृजित हैं। इनमें से 369 पशु चिकित्सक कार्यरत हैं, जबकि 53 खाली पड़े हैं। जयसिंहपुर के विधायक यादविंद्र गोमा की ओर से पूछे गए सवाल पर पशुपालन मंत्री ने यह जवाब दिया।
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आधे रास्ते छोड़ दीं कई सड़कें

हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग ने तीन ऐसी सड़कें बना दी हैं, जोकि गंतव्य तक नहीं पहुंच पाई हैं। इन्हें मंजिल तक पहुंचाने के लिए तकरीबन 5.23 करोड़ की दरकार है, लेकिन इसके लिए कब तक धन उपलब्ध हो पाएगा, इसकी जानकारी सरकार के पास उपलब्ध नहीं है।

कुल्लू के विधायक महेश्वर सिंह की ओर से पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री की ओर से सदन में यह जवाब दिया गया। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ये सड़कें बनाई गई हैं, जो मंजिल तक नहीं पहुंच पाई हैं। डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) के अनुसार इनका निर्माण कार्य भी पूरा हो चुका है।

इसमें निगुलसरी-तराण्डा, सैंज ढाक सरैन, घुरला डवकन सड़क शामिल है। सदन में दिए गए जवाब के अनुसार निगुलसरी-तराण्डा सड़क बनाने के लिए 2.98 करोड़, सैंज ढाक सरैन सड़क के लिए 45 लाख रुपये और घुरला डवकन सड़क के लिए 1.80 करोड़ रुपये की जरूरत है।
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