अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहर में भवन निर्माण को लेकर आए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के फैसले से परेशान लोगों ने अब सरकार और निगम प्रशासन से राहत की गुहार लगाई है। मंगलवार को मर्ज एरिया में शामिल मज्याठ और टुटू वार्ड के कुछ लोग स्थानीय पार्षद दिवाकर शर्मा की अगुवाई में सीएम वीरभद्र सिंह से हॉलीलॉज स्थित उनके आवास पर मिले।
इस दौरान पार्षद ने एनजीटी के फैसले से मर्ज एरिया के लोगों को आ रही परेशानियों के बारे में अवगत करवाया। पार्षद ने कहा कि एनजीटी के इस फैसले से न सिर्फ शहर के कोर एरिया पर असर पड़ेगा बल्कि मर्ज एरिया में रह रहे हजारों भवन मालिक भी प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि मर्ज एरिया में ज्यादातर लोगों के मकान अभी भी अवैध हैं। निगम में शामिल होने के बावजूद 80 फीसदी लोगों के मकान अवैध हैं, जिन्हें रेगुलर नहीं किया जा सका है। वहीं, एनजीटी के फैसले के बाद अब इन्हें रेगुलर करने के लिए भारी भरकम सेस चुकाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि नगर निगम और सरकार को इस मामले में चुनौती देनी चाहिए। पार्षद ने बताया कि सीएम ने उनकी मांगों को सुना है और जल्द लीगल एडवाइजर से बात कर मसले को उठाने का आश्वासन दिया है।
जब आवेदन ही नहीं किया तो कैसे रेगुलर होंगे मकान
पार्षद का कहना है कि भवन नियमितीकरण से जुड़ा एक मामला हाईकोर्ट में भी चल रहा था। इस साल 30 अप्रैल को इस पर स्टे लग गया। इसके बाद एनजीटी का फैसला आने तक शहर में कोई भी भवन मालिक नियमितीकरण को लेकर आवेदन नहीं कर पाया। जबकि, एनजीटी का फैसला कहता है कि 13 नवंबर से पहले जो आवेदन आए हैं, उन्हें नियमित किया जा सकता है। लेकिन जब 30 अप्रैल से 16 नवंबर तक कोई आवेदन ही नहीं कर पाया तो फिर नियमित किसे करेंगे। निगम इस पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट करे।
तीस दिन में दे सकते हैं चुनौती
एनजीटी के फैसले को रिव्यू करने के लिए 30 दिन के भीतर चुनौती दी जा सकती है। यदि रिव्यू पिटीशन नहीं होती है तो 90 दिन के भीतर फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। शहरवासी भी फैसले को लेकर सरकार और नगर निगम से चुनौती देने की मांग कर रहे हैं।
निगम हाउस में भी गूंजेगा एनजीटी मामला
नगर निगम की मासिक बैठक में भी इस बार एनजीटी का फैसला गूंजने वाला है। पार्षद दिवाकर शर्मा ने इस मसले पर निगम प्रशासन से सवाल पूछा है। पार्षद ने पूछा है कि निगम के तहत कुल कितने रिहायशी और व्यावसायिक भवन हैं। इनमें कितने नियमित और अवैध हैं। साथ ही नियमित करवाने के लिए कुल कितने भवन मालिकों ने आवेदन कर रखा है। इसके अलावा पार्षद ने पूछा है कि इन्हें नियमित करवाने और जनता को राहत देने के लिए निगम प्रशासन क्या काम कर रहा है?