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100 दिन: एक नजर में जयराम सरकार की बड़ी उपलब्धियां

Mon, 09 Apr 2018 01:02 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
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तीन माह के कार्यकाल में जयराम सरकार ने प्रदेश के हर वर्ग को साधने का प्रयास किया। सरकारी कर्मचारियों को वित्तीय लाभ देकर खुश किया तो टोल बैरियर पर हिमाचल नंबर की गाड़ियों को छूट देकर एक बड़े वर्ग को राहत पहुंचाई। प्रदेश में शराब की नई पॉलिसी बनाकर सरकार ने लूटखसोट को रोकने के लिए कदम बढ़ाए।

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बुजुर्गों, महिलाओं, युवाओं और विद्यार्थियों को भी कई सौगातें दीं। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही जयराम ठाकुर ने पहली कैबिनेट बैठक में बुजुर्गों को तोहफा देते हुए बिना आय की सीमा से दी जाने वाली वृद्धावस्था पेंशन की आयु सीमा 80 साल से घटाकर 70 साल की। पहले बजट भाषण में मुख्यमंत्री ने बड़ी घोषणाएं कर लोगों को सब्जबाग दिखाने से परहेज किया। छोटी-छोटी चीजों पर अधिक ध्यान देते हुए हर वर्ग को कुछ न कुछ राहत दी।

महिला सुरक्षा को लेकर दिखाई गंभीरता

महिला सुरक्षा को लेकर सरकार ने गंभीरता दिखाते हुए एक माह का कार्य काल पूरा होते ही पूर्ण राज्यत्व दिवस के अवसर पर महिलाओं के खिलाफ अपराध पर अंकुश लगाने के लिए गुड़िया हेल्पलाइन और शक्ति बटन की शुरुआत की।

इस हेल्पलाइन नंबर की सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से मानीटरिंग की जा रही है। सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने और निजी स्कूलों का मुकाबला करने के लिए स्मार्ट वर्दी शुरू करने का निर्णय लिया।

इसके अलावा स्कूली बच्चों को बैग भी देने की घोषणा की। अगले साल सरकार द्वारा स्कूली बच्चों को मुफ्त में स्कूल शूज भी मुहैया करवाए जाएंगे। इसके अलावा भी कई अन्य ऐसी घोषणाएं की गईं, जिससे समाज के विभिन्न तबके लाभान्वित हुए।

जयराम सरकार ने प्रदेशवासियों को दी यह सौगात

- सत्ता में आते ही कर्मचारियों को तीन फीसदी डीए देने का एलान किया। 
- पूर्ण राज्यत्व दिवस पर कर्मचारियों को आठ फीसदी अंतरिम राहत दी।
- बजट भाषण में कर्मचारियों को चार फीसदी और अंतरिम राहत दी गई।
- विभिन्न विभागों में नियुक्त अनुबंध कर्मियों का वेतन दोगुना कर दिया।
- एसएमसी शिक्षकों, मिड-डे मील वर्कर्स, आशा वर्कर्स और जलरक्षकों के मानदेय में बढ़ोतरी की।
- दिहाड़ीदार कर्मियों की दिहाड़ी भी 15 रुपये बढ़ाई।
- ऐसी महिलाओं को गैस सिलिंडर और चूल्हा देने के लिए आर्थिक सहायता देने की घोषणा की, जो उज्ज्वला योजना के तहत नहीं आई थी। 
- किसानों और बागवानों को सस्ती बिजली देने का एलान किया। 
- युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए औद्योगिक इकाइयां लगाने को 40 लाख तक के निवेश पर मशीनरियों पर 25 फीसदी तक अनुदान देने का फैसला लिया। 
- अनुबंध पर कार्यरत महिला कर्मचारियों का मातृत्व अवकाश 135 दिन से बढ़ाकर 180 दिन किया।
- सरकारी डिपुओं के माध्यम से दिए जाने वाले सस्ते राशन की खरीद करने की नीति बदली। केंद्रीय एजेंसी से गुणवत्ता युक्त और पौष्टिक दालों की खरीद का फैसला लिया।

मेधावियों को लैपटॉप बांटना भी सरकार की उपलब्धि में शामिल

प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से मार्च 2017 में दसवीं और जमा दो के टॉपरों को लैपटॉप बांटना भी सरकार ने अपनी बड़ी उपलब्धि मान लिया है। वार्षिक परीक्षाओं में उम्दा प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पांच से छह माह में लैपटॉप दिए जाते हैं। मार्च 2017 की वार्षिक परीक्षाओं में मेरिट सूची में नाम दर्ज करवाने वाले विद्यार्थियों को ये लैपटॉप पूरे एक साल बाद दिए जा रहे हैं।

इसके अलावा हर साल गरीब बच्चों को पुस्तकें वितरित करना भी सरकार की 100 दिन की उपलब्धि में शामिल है। सोमवार को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला (छात्र) धर्मशाला में लैपटॉप वितरण और पुस्तक वितरण कार्यक्रम को सरकार के 100 दिन की उपलब्धि के रूप में मनाया जा रहा है।

इसमें कांगड़ा, धर्मशाला और नगरोटा बगवां शिक्षा खंड से संबंधित स्कूलों के गरीब बच्चों को पुस्तकें वितरित की जाएंगी। मार्च-2017 के मेधावियों को लैपटॉप भी वितरित किए जाएंगे। कार्यक्रम को लेकर उप निदेशक उच्च शिक्षा कांगड़ा ने बाकायदा निमंत्रण पत्र बांटे हैं। इसमें लैपटॉप वितरण को सरकार के 100 दिन के एक्शन प्लान के तहत उपलब्धि करार दिया है। कार्यक्रम में खाद्य आपूर्ति मंत्री किशन कपूर को मुख्यातिथि होंगे।

फोटो बदलने में हो गई देरी
स्कूल शिक्षा बोर्ड की वार्षिक परीक्षाओं में दसवीं और जमा दो की मेरिट सूची में आने वाले विद्यार्थियों को सरकार लैपटॉप देती है। अप्रैल में परिणाम आने के बाद अगस्त और सितंबर में लैपटॉप बांटे जाते हैं। इनमें मुख्यमंत्री का फोटो लगा होता है।

साल 2017 के अंत में आचार संहिता के चलते लैपटॉप बांटने की प्रक्रिया रुक गई। प्रदेश में सरकार बदलने के बाद सभी लैपटॉप से पूर्व सीएम के फोटो हटाकर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का फोटो लगाया गया।

फोटो बदलने की प्रक्रिया को पूरा करने के बाद अब 2017 के मेधावियों को लैपटॉप बांटना बड़ी उपलब्धि में शामिल किया गया है। हिमाचल प्रदेश प्रारंभिक शिक्षा निदेशक मनमोहन शर्मा ने प्रदेश के सभी जिला के शिक्षा उप निदेशकों को पत्र जारी कर सरकार के 100 दिन के एक्शन प्लान के तहत पुस्तक वितरण कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं।

जयराम सरकार ने राजनीतिक नियुक्तियों में नई परंपरा की रखी नींव

जयराम सरकार ने सौ दिन के कार्यकाल में मुख्य सचेतक और उपमुख्य सचेतक तैनात करने का निर्णय लेकर नई परंपरा की नींव रखी। इन दो नए पदों का पारित विधेयक आने वाली सरकारों के लिए राजनीतिक नियुक्तियां करने का बेहतर विकल्प साबित होगा।

हालांकि, सरकार ने मुख्य संसदीय सचिव (सीपीएस) और निगम और बोर्डों के अध्यक्ष और उपाध्यक्षों जैसी राजनीतिक ताजपोशियों को तरजीह नहीं दी। विपक्ष सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि वीरभद्र सरकार ने सत्ता संभालते 9 सीपीएस सहित 45 लोगों को निगम बोर्डों के ताज बांटे थे।  

हिमाचल की राजनीति काफी सालों से वीरभद्र सिंह और प्रेम कुमार धूमल के इर्द-गिर्द घूमती रही है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के मुख्यमंत्री का चेहरा प्रेम कुमार धूमल ही हार गए। बहुमत के चलते जयराम ठाकुर को मुख्यमंत्री बनाया गया। तब से ही भाजपा राजनीति में नई समीकरण बने हैं।

जयराम की टीम में 6 नई विधायकों को मंत्री बनाया गया, जबकि धूमल गुट के कई विधायक मंत्री बनने से रह गए। सूत्र बताते हैं कि अब पुराने विधायक जो धूमल के करीबी थे, अब उन्हें फायदा देने के लिए इन दोनों पदों को क्रिएट किया गया है।  

तैनाती के लिए जोड़-तोड़ शुरू
भाजपा सरकार ने दोनों पदों में विधायकों की तैनाती के लिए जोड़-तोड़ शुरू कर दी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा कैंप, पूर्व सीएम शांता कुमार और प्रेम कुमार धूमल के करीबियों के बीच प्रतिस्पर्धा है। तीनों दिग्गज मंत्रिमंडल से बाहर रहने अपने चहेते विधायकों की ताजपोशी चाहते हैं। फिलहाल, धूमल के करीबी माने जाने वाले पूर्व मंत्री नरेंद्र बरागटा और शांता कैंप से रमेश धवाला प्रबल दावेदार हैं। 

कर्मचारियों के तबादले बने गले की फांस

सत्ता संभालने के बाद पहले स्वागत समारोह फिर अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले सरकार के गले की फांस बने रहे। विपक्ष ने तबादलों को लेकर सरकार को हर मौके पर घेरा। नौबत यहां तक आ गई कि मंत्रिमंडल को तबादलों पर रोक लगानी पड़ी। स्थानांतरण प्रक्रिया से सरकार ने परहेज किया, लेकिन डीओ नोट आना कम नहीं हुए। इस दौरान सरकार ने तमाम विरोधों के बीच तबादलों को पारदर्शी बनाने के लिए शिक्षकों के लिए ट्रांसफर एक्ट लाने की नई पहल की है। 

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर यह स्वयं कह चुके हैं तबादला रूटीन की प्रक्रिया है। भाजपा सरकार का दावा है कि अब तक अफसरों और कर्मचारियों के 2100 तबादले किए हैं, लेकिन विपक्ष इससे सहमत नहीं है। विपक्ष ने दावा किया कि तीन महीने में सरकार ने 10 हजार से अधिक कर्मचारियों और अफसरों के तबादले किए हैं।

सरकार ने विपक्ष को आइना दिखाने के लिए पूर्व सरकार के पांच साल में सवा लाख तबादलों का आंकड़ा सदन में रखा। तबादलों पर आरोप प्रत्यारोप सदन के भीतर ही नहीं बाहर भी खूब चले। अब सरकार शिक्षकों के लिए तबादला एक्ट लाने के साथ उसे अन्य विभागों में प्रभावी बनाने की तैयारी कर रही है। इसको लेकर भले भाजपा में अंदरखाते मतभेदों की बात की जा रही है, लेकिन मुख्यमंत्री जयराम ने साफ किया है कि एक्ट प्रभावी होगा। 

मंत्री किए चतुर्थ श्रेणी के तबादलों तक सीमित 
अभी तबादला आदेश मुख्यमंत्री कार्यालय से हो रहे थे, लेकिन अब सरकार ने मंत्रियों को कुछ अधिकार दिए हैं। मंत्री केवल चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के तबादले अपने अनुरूप कर सकेंगे। 

अब एक्शन मोड में जयराम सरकार
सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री ने विभागों को आदेश दिए थे कि वह 100 दिन का एजेंडा तैयार करें। विभागों की ओर से यह एजेंडा मंत्रियों के पास पहुंच गया है। अब सरकार इस एजेंडे पर काम करने जा रहा है। जिन अफसरों की प्रोग्रेस ठीक नहीं होगी, उन पर तबादला गाज गिरना भी तय है।
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विपक्ष के निशाने पर रही जयराम सरकार

जयराम सरकार के सौ दिन पूरा होने के बीच सरकार विपक्ष के निशाने पर रही। पहले तीन महीने मेें दो बार विधानसभा सत्र हुआ। सरकार के सत्ता संभालने के बाद धर्मशाला में पहला सत्र हुआ तो शिमला में बजट सत्र पिछले दिनों संपन्न हो गया। सदन के भीतर और बाहर विपक्ष ने सत्ता पक्ष को वित्तीय प्रबंधन, तबादलों, बेरोजगारी और चुनावी घोषणाओं जैसे मुद्दों पर लगातार घेरा।

प्रदेश की 13वीं विधानसभा के दोनों सत्रों में कांग्रेस ने सत्ता पक्ष को लगातार घेरा। धर्मशाला में सरकार राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान घिरी रही। गुड़िया और होशियार जैसे मामलों पर भी कांग्रेस भाजपा सरकार पर निशाना साधती रही। प्रदेश विधानसभा में पांच अप्रैल को संपन्न हुए बजट सत्र में भी विपक्ष का रुख आक्रामक रहा। सत्ता पक्ष ने कांग्रेस विधायक दल के नेता को विपक्ष के नेता की मान्यता ही नहीं दी।

कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री की अगुवाई में विपक्ष ने कडे़ तेवर अपनाए रखे। सरकार को शुरू में ही 1000 करोड़ का कर्ज उठाने पर घेरा गया। सरकार सफाई देती रही कि ये पुरानी देनदारियों को चुकाने को लेना पड़ा है। कर्मचारियों के बड़ी संख्या में हुए तबादलों पर भी सरकार पर निशाने पर रही। सड़कों, पानी, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा की बदहाली की बात करने के  अलावा कांग्रेस ने सरकार को सरकारी संस्थानों को बंद करने के मामले पर भी घेरा।
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