- रघुनाथ मंदिर को सरकारी नियंत्रण से बाहर किया
- धारा 118 के तहत जमीन खरीद के मामलों की जांच शुरू
- परिवहन विभाग में हुई टायर खरीद की धांधली की जांच शुरू
- कंडक्टर भर्ती के दौरान हुए घोटाले की जांच शुरू
- अनियमितताओं के आरोपों के बाद भंग किया केसीसी बैंक का बोर्ड
- चार्जशीट में दर्ज कई पेड़ कटाने के मामलों की हो रही विजिलेंस जांच
- शराब बिक्री में हुए घपले के चलते निरस्त की पिछली शराब नीति
- हिमाचल प्रदेश बीवरेजेस कारपोरेशन को किया भंग
- अवैध खनन व पेड़ कटान के मामलों की तैयार की जा रही सूची
- पिछली सरकार में हुई पाइपों की खरीद की जांच के आदेश
भाजपा ने पिछली वीरभद्र सरकार के कार्यकाल के दौरान 24 दिसंबर, 2016 को वीरभद्र सिंह और अन्य के खिलाफ राज्यपाल आचार्य देवव्रत को चार्जशीट सौंपी थी।
राजभवन ने सरकार को चार्जशीट भेजी, लेकिन राजनीतिक आरोप बताकर तत्कालीन सरकार ने आरोपों को खारिज कर चार्जशीट को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
अनिल शर्मा का भी है नाम
भाजपा की चार्जशीट की जांच में जयराम सरकार के ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा का भी नाम है। अनिल शर्मा पिछली वीरभद्र सरकार के दौरान पंचायतीराज मंत्री थे।
चार्जशीट में उनके खिलाफ पशुपालन विभाग में दवाएं खरीदने के लिए ब्लैकलिस्ट कंपनियों के साथ रेट कांट्रेक्ट करने का आरोप लगा।
इसके अलावा मंडी के राजमहल जमीन बेनामी सौदे में भी मंत्री द्वारा लेनदेन करने का आरोप लगा। इसके अलावा सबसे बड़ा आरोप आय से अधिक संपत्ति का लगाया गया।