समय : 11:28 बजे, स्थान : ढली टनल। टनल के बाहर ढली फल मंडी की ओर बेतरतीब गाड़ियां खड़ी हैं। ट्रैफिक संभालने में पुलिस कांस्टेबल को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही हैं। यहां सिर्फ एक कांस्टेबल ड्यूटी पर तैनात है। स्थान : ढली सब्जी मंडी, सब्जी मंडी के बाहर वाहनों की लंबी कतार लगी है। एंट्री प्वाइंट पर पुलिस कर्मी तैनात हैं लेकिन मंडी के भीतर जगह न होने से मुख्य सड़क के किनारे ही सब्जियों से लदे वाहनों की कतार लगी हैं। कतार ढली थाने होते हुए ढली चौक तक पहुंच गई हैं। स्थान: ढली चौक, ढली चौक पर अव्यवस्था का आलम है। बड़ी संख्या में गाड़ियां चौक पर पहुंच रही हैं। सैलानियों की गाड़ियों और सेब के ट्रालों से ट्रैफिक जाम हो गया है। ढली चौक से हसन वैली की ओर वाहनों की लंबी कतार लगी हैं। ढली बॉयफरकेशन पर पेड़ गिरने से मलबा सड़क पर आ गया है। हसन वैली में एक कांस्टेबल तैनात है।
सेब की गाड़ियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने छराबड़ा में बैरियर स्थापित कर रखा है। छराबड़ा बैरियर से कुफरी होटल मैनेजमेंट संस्थान की ओर रोजाना सेब से लदी पिकअप की लंबी कतार लग रही हैं। यहां गाड़ियों के चालकों और बागवानों को दस से बारह घंटे भूखे प्यासे इंतजार करना पड़ रहा है। रात बारह बजे से लेकर यहां सेब से लदी गाड़ियों को रोक कर रखा जाता है। वाहन चालकों और बागवानों के लिए यहां न तो खाने पीने का इंतजाम है न ही सार्वजनिक सुविधा की कोई व्यवस्था है। घने जंगल के बीच गाड़ियों में सो कर यहां ड्राइवर और बागवान रातें गुजार रहे हैं। आधी सड़क पर सेब से लदी गाड़ियां खड़ी रहती हैं और बाकी बची जगह पर वन वे ट्रैफिक चलाया जाता है, जिससे बार बार जाम की स्थिति बन जाती है।
प्रशासन ने सेब सीजन के मद्देनजर मास्टर प्लान तैयार किया था। दावा था कि 300 जवान ट्रैफिक व्यवस्था संभालेंगे। एप्पल हेल्प लाइन भी शुरू हुई थी। आईआरबीएन जुन्गा और पंडोह बटालियन के जवानों की तैनाती की बात कही थी। सेब सीजन के रफ्तार पकड़ते ही व्यवस्थाएं हांफनी शुरू हो गई हैं। शहर में भीड़ भाड़ वाली जगह पर फल मंडी स्थापित होने के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग 05 से होकर आवाजाही करने वाले स्थानीय लोगों और सैलानियों के लिए परेशानी खड़ी हो गई है।
फल मंडी में तीन बजे आक्शन यार्ड पैक
भट्ठाकुफर फल मंडी में आक्शन यार्ड छोटा होने के कारण बागवानों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। मंडी में सेब की खरीद फरोख्त का काम शाम पांच बजे तक चलता है लेकिन इन दिनों दो बजे ही आक्शन यार्ड सेब की पेटियों से पैक हो जाता है। जगह न होने के कारण बागवानों को अपनी फसल बेचने में भारी परेशानी झेलनी पड़ती है। कई बार समय से मंडी न पहुंचने के कारण बागवानों को माल बेचने के लिए दूसरे दिन तक इंतजार करना पड़ता है।