प्रोजेक्ट पर मिशन पीरियड (2013-17)के दौरान 4.93 करोड़ रुपये खर्च किए गए लेकिन निर्माण पूरा न होने से बाकी बची करीब 23.50 करोड़ रुपये की ग्रांट लैप्स हो सकती है।
रिपोर्ट में जेएनएनयूआरएम के तहत पेयजल व्यवस्था सुधारने के लिए मिले पैसों को दूसरे कार्यों में लगाने का भी जिक्र किया गया है। हालांकि, इन पैसों को परियोजनाओं की मेन पाइपलाइन बदलने के लिए किया गया है जिनसे लीकेज की समस्या नहीं रहेगी।
धूल फांकती रही फाइलें, सोए रहे अफसर
नगर निगम के यह सारे प्रोजेक्ट 2010 से लेकर 2015 के बीच के हैं। शुरुआती दो से तीन साल तक तो इनका काम फाइलों तक सीमित रहा। नए आयुक्त पंकजराय के प्रयासों के बाद इनके काम में तेजी आई।
आजीविका भवन और गरीब आवासों को तैयार करने के लिए छह माह में कई बैठकें हो चुकी हैं। बाकायदा हर हफ्ते इनकी स्टेट्स रिपोर्ट भी ली जा रही है। लेकिन यदि निगम के पिछले अफसर समय से जाग जाते तो पैसा लैप्स न होता और गरीबों को घर भी मिल गए होते।
केंद्र सरकार से करेंगे मांग
निगम आयुक्त पंकज राय ने कहा कि आजीविका भवन की ग्रांट को लेकर वह जल्द दिल्लीजाएंगे। केंद्र सरकार से ग्रांट देने की मांग की जाएगी। आवास योजना अभी 2022 तक चलनी है। ऐसे में इसका पैसा लैप्स नहीं होगा।
पिछले नगर निगम की लापरवाही
प्रोजेक्टों में देरी पिछले नगर निगम की लेटलतीफी के चलते हुई है। यदि समय पर काम शुरू होता तो आज गरीबों और तहबाजारियों को पक्के ठिकाने मिल जाते। वर्तमान निगम पिछले अटके कामों को जल्द निपटाने के लिए कदम उठा रहा है। नई कामों के लिए हमने समयसीमा तय की है। - कुसुम सदरेट, महापौर नगर निगम