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सरकार के फैसले से प्राध्यापक खफा

Mon, 21 Jul 2014 05:30 AM IST
Shimla
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शिमला। प्रदेश सरकार के पेरेंट्स टीचर एसोसिएशन (पीटीए) के माध्यम से कॉलेज शिक्षकों की भर्ती से रोक हटाने के फैसले का कॉलेज प्राध्यापकों ने विरोध किया है। विरोध का पहला कारण शिक्षा में गुणवत्ता न आना, 2002 में कोर्ट ने शिक्षकों की अस्थाई भर्ती पर रोक लगाना और राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) में भी प्रावधान है कि शिक्षकों की नियमित भर्ती होनी चाहिए। प्राध्यापकों का आरोप है कि जिस पीटीए को शिक्षकों की भर्ती करनी है, वे स्वयं भी वैध नहीं। इनमें अधिक तर तो सोसाइटी एक्ट में रजिस्टर तक नहीं हैं। ऐसे में कॉलेज प्रबंधन को सबसे पहले पीटीए का गठन करना होगा। इसके लिए कम से कम एक महीने का समय लगेगा। एचपी एजूकेशन कोड 2004 के तहत हर सेशन में नई पीटीए का गठन किया जाना अनिवार्य है। एसोसिएशन के सदस्य केवल अभिभावक ही बन सकते हैं गार्जियन नहीं।
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प्रदेश के 90 फीसदी से अधिक कॉलेजों में पीटीए के चुनाव वर्षों से नहीं हुए हैं। जहां हुए हैं, वहां पिछली पीटीए ही अगली पीटीए की चुनाव करके जाती है। प्रदेश के विभिन्न कॉलेजों में करीब 1500 शिक्षकों की आवश्यकता है। हाल ही में खुले 15 नए कालेजों में भी शिक्षकों की कमी है।
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तीन दिन पहले सरकार ने पीटीए शिक्षकों की भर्ती पर लगी रोक हटा दी है। पेरेंट्स टीचर एसोसिएशन अब कॉलेजों में खाली पदों पर खुद अध्यापक रख सकेंगी। ये शिक्षक पीटीए, स्टाप गैप और पीरियड आधार पर रखे जाएंगे। ये नियुक्तियां ग्रांट इन एड के तहत नहीं होंगी। इस बारे प्रधान सचिव शिक्षा ने 16 जून को जारी अधिसूचना को संशोधित करते हुए नए सिरे से उक्त को आदेश जारी किए हैं।
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इन कारणों से विरोध
- शिक्षा की गुणवत्ता होगी प्रभावित
- कोर्ट के आदेशों की अवहेलना
- रूसा के नियमों का भी उल्लंघन
- क्वालिफाइड शिक्षक नहीं आते
- राजनीतिकरण के कारण सही भर्तियां नहीं होती
- नियमों के विरुद्ध प्रिंसिपल ही करते हैं भर्तियां
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फैसले का विरोध, गैरकानूूनी है पीटीए बॉडी
सरकार ने जो पीटीए के तहत शिक्षकों को फिर से रखने का फैसला किया है, संघ इसका विरोध करता है। लंबे संघर्ष के बाद कोर्ट ने सरकार को शिक्षकों की नियमित भर्ती के निर्देश दिए थे। अब जिन पीटीए बॉडी पर इन शिक्षकों की भर्ती का जिम्मा है, उनमें 90 फीसदी से अधिक गैरकानूनी है। इनके तहत होने वाली भर्तियों में राजनीतिक हस्तक्षेप बहुत अधिक है। हम सरकार से जानना चाहते हैं कि इससे कहां क्वालिटी एजूकेशन आएगा।
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- आरके कायस्था, प्रदेश राजकीय महाविद्यालय प्राध्यापक संघ (हेग्टा)
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