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सेब आयात शुल्क पर धोखा किया यूपीए ने

Mon, 31 Mar 2014 05:35 AM IST
Shimla
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शिमला। स्कूल लेक्चरर की सरकारी नौकरी छोड़ राजनीति में कूदे वीरेंद्र कश्यप कांग्रेस का गढ़ रही शिमला सीट पर बतौर भाजपा प्रत्याशी दोबारा चुनौती देने उतरे हैं। कसौली विधानसभा क्षेत्र के दौरे के दौरान उन्होंने अमर उजाला के पांच तीखे सवालों का सामना किया। पेश हैं सवाल और उनके जवाब :
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1. आप लगातार करीब 10 चुनाव हारने के बाद 2009 में शिमला से पहला चुनाव जीते थे। पिछले पांच साल के आपके रिपोर्ट कार्ड में कोई उल्लेखनीय काम नहीं दिखता। फिर जनता आपको क्यों वोट दे?
वीरेंद्र कश्यप : पिछले पांच साल जनता के बीच रहा हूं। लोगों की जरूरत के अनुसार सांसद निधि खर्च की। 15वीं लोकसभा के पहले सत्र के प्राइवेट मेंबर डे पर चर्चा की शुरुआत संसद में मैंने की। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की एनडीए सरकार में शिमला संसदीय क्षेत्र के लिए मैंने कुछ लक्ष्य तय किए हैं। इन्हें पूरा करने के लिए वोट मांग रहा हूं।
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2. प्रचार में 2009 के एक स्टिंग की सीडी आपका पीछा करेगी। विजिलेंस ने आपके खिलाफ एफआईआर दर्ज की। इस सीडी के बारे में आप क्या कहेंगे?
वीरेंद्र कश्यप : 2009 में उन्हें बदनाम करने की कोशिश के तहत यह झूठी सीडी सामने आई थी। तब सांसद नहीं था। मेरे ही कार्यकर्ताओं ने होटल में मिली धनराशि को पुलिस के हवाले किया था। पुलिस ने तब जांच की और रिपोर्ट में कुछ नहीं मिला। अब जब दोबारा लोकसभा चुनाव आए तो कांग्रेस सरकार ने चुनावी लाभ लेने और मेरी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने के लिए ये चाल चली है। इसका जवाब संसदीय क्षेत्र की जनता देगी।

3. आप पर ये भी आरोप है कि आपने सांसद रहते सभी विधानसभा क्षेत्रों को एक नजर से नहीं देखा। सोलन में आपने 5.50 करोड खर्च किए। ऐसा क्यों?
वीरेंद्र कश्यप : मैंने पूरी सांसद निधि ब्याज सहित खर्च की। प्राथमिकता ऐसे कामों को दी, जिनसे ज्यादा से ज्यादा लाभ आम लोगों को मिल सके। तीनों जिलों में बराबर धनराशि बांटी। ऐसे में ये आरोप सरासर गलत है।

4. आप न सेब पर आयात शुल्क बढ़ा पाए, न ही रोहडू हाइवे ठीक करा पाए। जबकि आपकी पार्टी के सांसद अनुराग ठाकुर केंद्र से लड़ झगड़कर चार नई रेल सेवाएं शुरू करवाने में कामयाब रहे।
वीरेंद्र कश्यप : सेब आयात का मसला बार-बार संसद और मंत्रालय से उठाया। यूपीए सरकार बागवानों से अन्याय कर रही है। इसलिए ये मांग एनडीए सरकार में पूरी करवाएंगे। पहले भी आयात शुल्क वाजपेयी की एनडीए सरकार ने बढ़ाया था। रोहडू हाइवे का मसला राज्य सरकार के क्षेत्राधिकार में आता है। केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट में हमेशा बाधा डालने का काम किया है।
5. आपने गिरिपार को ट्राइबल क्षेत्र बनाने और अफीम की खेती को वैध करने के मसले उठाए। लेकिन पांच साल में ये दोनों ही मसले हल नहीं हुए। क्यों?
वीरेंद्र कश्यप : मैंने संसद में मसला उठाया, तभी केंद्र सरकार ने ट्रांसगिरि क्षेत्र को ट्राइबल दर्जा देने की प्रक्रिया शुरू की। केंद्र सरकार की एजेंसी ने इस बारे में अब राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है। उम्मीद है मसला जल्द सुलझ जाएगा। जहां तक अफीम की खेती का मसला है तो ये विषय कई मंत्रालयों के बीच का है। कई राज्यों में भी ये मसला काफी विवादित रहा है। फिर भी मैंने इसे सुलझाने की पूरी कोशिश की।
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