दरअसल डॉक्टर दिव्या सिंह के पति भारतीय विदेश सेवा में कार्यरत हैं। लेकिन मार्च में भारत आने के बाद उन्हें यह एहसास हुआ कि उन्हें अपने पेश से रोगियों की मदद करनी चाहिए। मार्च के पहले सप्ताह में जब वो भारत लौटीं तो यहां पर 400 से भी कम कोरोना संक्रमण के मामले थे। उन्हें विदेश से लौटने के एक सप्ताह बाद ही मुंबई के एक स्वयंसेवक समूह ने संपर्क किया। उस समूह को मुंबई के स्लम एरिया वर्ली और धारावी में महामारी की निगरानी करने के लिए कुछ मेडिकल पेशेवरों की जरूरत थी। जिसके साथ वो जुड़कर डॉक्टर दिव्या एक महीने लोगों में इंफ्लूएंजा के लक्षणों की पहचान करने में मदद कर रही हैं।
इस काम के लिए उन्हें सर्वे करने घर-घर जाना होता है। जिसमें कोरोना वायरस की चपेट में आने का बहुत ज्यादा खतरा होता है। लेकिन वो अपनी जान की परवाह न करते हुए रोजाना इस सर्वे को पूरा कर रही हैं। इसके साथ ही भारत में रोजाना बढ़ते मामलों को देखते हुए उन्होंने बालों को काटकर इन्हें एक एनजीओ को दान देने का फैसला किया। ये एनजीओ कैंसर के रोगियों के लिए विग बनाने का काम करता है। पहले तो डॉक्टर दिव्या के माता-पिता उनके इस फैसले से बहुत डरे हुए थे। क्योंकि महामारी के वक्त घर से निकलकर इस तरह का काम करना काफी जोखिम भरा था। लेकिन अब वो अपनी बेटी की समाज सेवा की भावना से काफी गर्व महसूस कर रहे हैं।