पिता का मिला साथ
जब रजनी के पिता को बेटी के इस काम की जानकारी हुई, तो उन्होंने रजनी को रोका नहीं लेकिन आने वाली मुसीबतों के बारे में आगह जरूर किया। पिता का साथ मिलने के बाद रजनी ने जासूसी में खुल कर काम करना शुरु किया। रजनी ने हजारों केस सुलझाए। कभी नौकरानी तो कभी गर्भवती औरत का भेष लेकर वह पेचीदा से पेचीदा केस हल करने लगीं।
रजनी के जीवन का सबसे मुश्किल केस
भारतीय पहली महिला जासूस बन चुकी रजनी के लिए एक केस काफी मुश्किल था। शहर में एक पिता और उसके बेटे का डबल मर्डर हुआ था। हत्या करने वाले का कोई सुराग नहीं मिल रहा था। रजनी को यह केस मिला, तो वह हत्या का पता लगाने के लिए पिता और पुत्र के घर पर ही नौकरानी का भेष लेकर पहुंची। छह महीने नौकरानी के तौर पर काम करने के बाद उन्हें असली हत्यारे का पता चल गया। घर में मौजूद महिला ने ही अपने प्रेमी के साथ मिलकर पिता और पुत्र की हत्या की थी।
रजनी की जासूस एजेंसी
काम बढ़ा तो रजनी ने 1991 में अपनी जासूसी एजेंसी खोल ली, जो इसी तरह के केस को हल किया करती थी। छोटे बड़े मिलाकर रजनी ने 80 हजार से ज्यादा केस हल किए थे। उन्हें कई अवार्ड्स से सम्मानित किया गया। एक केस के दौरान उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार भी किया था। आरोप था कि उन्होंने केस साॅल्व करने के लिए गलत तरीके से काॅल डिटेल्स निकलवाईं थीं। लेकिन रजनी ने अपने बचाव में कहा था कि बतौर जासूस यह उनके काम का हिस्सा है।