इस इनिशिएटिव के तहत प्रो बेला मानसिक, शारीरिक और दृष्टिबाधित दिव्यांगजनों की सहायता कर रही हैं। वे पेड़ पौधों की सहायता से दिव्यांगों के मोटर न्यूरॉन स्किल्स को ठीक करने का काम करती हैं। मोटर न्यूरॉन स्किल से तात्पर्य शरीर के अंगों का मस्तिष्क के साथ सही तालमेल से है।
उनके बगीचे में दिव्यांगजन पौधे लगाने, पौधों को सींचने, गमले को तैयार करना, बीज बोने जैसे कई काम करते हैं। इसका सकारात्मक असर उनके मोटर न्यूरॉन स्किल पर पड़ता है। इसे करने से दिव्यांग लोगों के रिफ्लेक्सेस भी तेज होते हैं। उन्हें रोजाना इन कामों को करने की ट्रेनिंग दी जाती है।
मोटर न्यूरॉन के इम्प्रूव होने से दिव्यांगों को रोजाना के काम करने के लिए किसी दूसरे व्यक्ति पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। वे इन कामों को खुद से ही आसानी से कर सकेंगे। प्रो बेला के इस इनिशिएटिव का मकसद दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनाना है।
प्रो बेला को इस काम के लिए देश दुनिया से खूब समर्थन मिल रहा है। उन्हें अमेरिकन हॉर्टिकल्चर थेरेपी एसोसिएशन द्वारा सम्मानित भी किया गया है। ऐसे में प्रो बेला देश दुनिया में करोड़ों लोगों के लिए एक मिसाल बन गई हैं, जो अपने इन अनोखे प्रयासों से कई दिव्यांगजनों को एक नई जिंदगी दे रही हैं।